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वर्तमान चुनावी परिणामों का संकेत- भारत में सनातन धर्म खतरे में-रामराज्य प्रशासन

जय श्रीराम। जैसा कि आज भारत में हुए पांच राज्यों के  विधानसभा चुनाव के परिणाम में यह देखने में आया कि हिंदुत्व के नाम पर राजनीति करने वाली प्रमुख राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी को हिन्दुओं ने ही नकार दिया और अपने जन्म के साथ ही हिंदुत्व की विरोधी रही कांग्रेस पार्टी को सत्ता मैं लौटा दिया।

वास्तव में हिंदू धर्म जो कि भारत में सनातन धर्म का वर्तमान पर्याय है, जिसका जन्म भारत में हुआ और यह भारत में ही विकसित और पूरे विश्व में प्रसारित हुई। आज भारत में ही वह संकट में है यूं तो कहने के लिए यह सनातन धर्म है परंतु इसकी सनातनता भी खतरे में है।

वर्तमान सनातन धर्म का मुकाबला ईसाइयत और इस्लामिक शक्तियों से है, वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपेक्षाकृत ईसाई और इस्लामिक शक्तियां अधिक शक्तिशाली हैं जबकि संख्या की दृष्टि से वह बहुत ही कम है और दूसरी ओर सनातन धर्म संख्या की दृष्टि से बहुत अधिक होने के बाद भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दृष्टि से बहुत कमजोर है।

यदि विश्लेषण किया जाए तो यह पता चलेगा कि पृथ्वीराज चौहान के हार के पश्चात सनातन धर्म घोर अंधकार के युग में समात चला गया। और आज से 70-71 वर्ष पूर्व सनातन धर्म के अनुयायियों को स्वतंत्रता के नाम इस्लाम और ईसाइयत के साथ रहने के लिए स्वतंत्रता दे दी गई। साथ ही सनातन धर्म को इस बात के लिए बाध्य किया गया कि वह पिछले हजार वर्षों के अत्याचारों को कभी याद नहीं करेंगे और अपना प्रभुत्व दिखाने का प्रयास नहीं करेंगे, जिसके लिए संविधान का गठन करके इस व्यवस्था को लिपिबद्ध कर दिया गया और सनातन धर्म के अनुयायियों ने इस संविधान को ब्रह्मा का वाक्य मानकर आत्मसात कर लिया।

भारतीय जनता पार्टी जो कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों द्वारा संचालित की जाने वाली राजनीतिक दल है, वह इन सनातन धर्म के मानने वाली जनता को विभिन्न प्रकार के आश्वासन देकर पहली बार पूर्ण बहुमत से सत्ता को प्राप्त कर लिया परंतु पिछले 1000 वर्षों के घोर अंधकार में हुए अत्याचारों को समाप्त करने का वादा करने के बाद भी बहुत कुछ कर नहीं पाई और सारा ध्यान भौतिक विकास की ओर लगा दिया।

दूसरी ओर ईसाइयों द्वारा बनाई गई संस्था कांग्रेश ने इस्लामिक और इसाई शक्तियों की मदद से हिन्दुओं को भ्रमित कर के सत्ता में पुनः अपनी वापसी कर ली।

यदि गौर से देखा जाए तो आज भी सनातन धर्म के अनुयाई जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, संपत्ति संग्रहवाद, भाई भतीजावाद, लोभ और लालच में अपने धर्म और कर्म को तिलांजलि देने का स्वभाव इत्यादि से ग्रसित हैं। और वर्तमान बहुमतवादी लोकतांत्रिक व्यवस्था में  नेताओं के संवादों के आकर्षण उसी प्रकार फसे रहते हैं जैसे बीन की धुन से सपेरा सांप को अपने बस में कर लेता है।

दूसरी ओर इस्लामिक शक्तियां भारत को अपने प्रजनन शक्ति के प्रयोग द्वारा इस्लामिक गणराज्य के रूप में स्थापित करने की ओर आगे बढ़ रही हैं, भारत का जननांकिय गणित जो कि लोकतंत्र का आधार होता है, धीरे धीरे इस्लामिक आबादी के नियंत्रण में आता जा रहा है 1-1 जनपद और राज्य धीरे धीरे इस्लामिक आबादी के शिकार होते जा रहे हैं जो कि बहुत ही रणनीति तरीके से हो रहा है। इसके साथ ही लोगों को बहलाकर, फुसलाकर, डराकर, लव जिहाद इत्यादि द्वारा मुसलमान बनाने का सफल प्रयोग भी लगातार चल रहा है, साथ ही अड़ोस-पड़ोस के मुस्लिम देशों से पलायन द्वारा भी भारत की आबादी का इस्लामीकरण किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त ईसाइयों द्वारा भी बड़े पैमाने पर अपनी शिक्षा प्रणाली के प्रयोग द्वारा, धर्मांतरण द्वारा, सनातन जनमानस को सॉफ्ट ईसाई बनाने का प्रयोग लगातार सफलतापूर्वक किया जा रहा है।

उक्त दोनों ही शक्तियों के आगे हिंदू शक्तियां अत्यंत ही कमजोर और रणनीति विहीन है। केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जो अपनी शाखाओं के माध्यम से थोड़ा जागरण कर पाता है, उसके बाद भी यह उतना प्रभावी नहीं हो पा रहा है की सनातन धर्म की रक्षा की जा सके। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जो सकारात्मक प्रभाव है उसका 80% हिस्सा बौद्धिक तक ही सीमित है और वह बौद्धिक भी भारतीय जनता पार्टी के लिए कोई मायने नहीं रखता है क्योंकि संविधान ही भारतीय जनता पार्टी का अभीष्ट है।

इसीलिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि वर्तमान लोकतांत्रिक शासन प्रणाली सनातन धर्म के लिए लकड़ी की जलती हुई चिता है और वर्तमान चुनाव के परिणाम इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत में सनातन धर्म खतरे में है।

Comment(1)

  1. Reply
    Ali Bahubali says

    Bharat men Sanatan Dharm usi din khatre me aa gaya, jis din se Sanatan Dharm ko bachane ka Theka tatha kathit logon ke hatth men aa gaya.

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