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रामराज्य में बंधुत्व के लिए गले मिलने की सनातन परंपरा है।

राजा रामचंद्र की जय। सनातन धर्म जो कि पूरे विश्व में मनुष्य का मूल धर्म है रूपी समाज में बंधुत्व की कमी एक बहुत बड़ी समस्या है, जिसके कारण पूरा का पूरा समाज आपस में बंटा हुआ प्रतीत होता है। जिसके कारण कलयुग में उत्पन्न हुए अनेकानेक विधर्मी संप्रदाय सनातन धर्म के ऊपर अपना दुष्प्रभाव डालते जा रहे हैं।

सनातन धर्म को पुनः प्रभावशाली बनाने और समस्त संसार में रामराज्य का संचालन करने के लिए यह आवश्यक है कि बंधुत्व के मूल को हम पुनः सींचना प्रारंभ करें। इसलिए जब भी आप मिले तो गले मिलें। आप विदा हों तो गले मिलकर विदा हों।

समाज में विभिन्न प्रकार के समय-समय पर मेल-मिलाप व आयोजन होते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में सनातन धर्म के लोग सम्मिलित होते हैं। जैसे कि विवाह, यज्ञ, भोज, राजनीतिक सभाएं, प्रार्थना स्थल, सत्संग, विभिन्न उत्सव, पारिवारिक मिलन इत्यादि।

इन सुख व दुख के अवसरों पर जब भी स्वजनों मित्रों भाई बंधुओं से मिलें, तो गले मिलना ना भूलें, क्योंकि गले मिलकर जो अनुभूति बंधुत्व की होती है, वह अन्य किसी स्वरूप में संभव नहीं है। अतः रामराज्य प्रशासन सभी से आग्रह करता है की आपस में गले मिलने की परंपरा को पुनः विकसित व प्रसारित करके व्यवहारिक जगत में उतारें।

रामायण की सारी की सारी कथा हमें बंधुत्व की शिक्षा गले मिलने के माध्यम से ही सिखाती है और रामराज्य बिना बंधुत्व के संभव नहीं है। अतः गले मिलें, गले लगाएं, आपस में बंधुत्व को बढ़ाएं।

रामराज्य प्रशासन का उक्त विषय यदि लोक कल्याणकारी हो तो इसे अपने बंधु-बांधवों तक अवश्य शेयर करें और अपना कमेंट भी प्रस्तुत करें।

राजा रामचंद्र की जय।

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