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इस्लामिक ग्रंथ भारतीय न्यायालय के समक्ष

जैसा कि यह विदित है कि दुनिया के सभी धार्मिक संप्रदाय अपने देवता के उपदेशों का पालन करते हैं। इसी प्रकार से इस्लाम नाम का एक धार्मिक संप्रदाय है जो मुख्य रूप से अरब देशों से उत्पन्न होकर लगभग पूरी दुनिया में फैला, इसी संप्रदाय का एक ग्रंथ है जिसे कुरान के नाम से जाना जाता है।

इस ग्रंथ के माध्यम से इस्लामिक समाज अपने बच्चों को शिक्षा प्रसारित करता है, जिसमें शिक्षा की कुछ बाते अन्य सम्प्रदायों के विरुद्ध भी हैं। जिनके संबंध में गैर इस्लामिक समाज द्वारा हमेशा आपत्ति जताई जाती रही है। इन्हीं आपत्तियों को आधार बनाकर के मुस्लिम विद्वान शिया वक्फ बोर्ड पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी (Wasim Rizvi) ने भारतीय उच्चतम न्यायालय  (Supreme Court of India) में कुरान की 26 आयतों को हटाने के लिए जनहित याचिका दायर कर दी है। रिजवी की इस मांग ने एक अलग ही तरह की बहस को जन्म दे दिया है। रिजवी के अनुसार, कुरान की इन आयतों से देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को खतरा है ।इस विषय पर जाने से पहले जान लेते हैं कि आखिर उन 26 आयतों मेंं ऐसा क्‍या है, जिसके कारण उन्‍हेंं वसीम रिजवी विवादित कह रहे हैं। जनहित याचिका के अनुसार, ये आयतें नकारात्मक हैं और हिंसा व नफरत को बढ़ावा देती हैं।

ये हैं वो 26 आयतें
1- Verse 9 Surah 5 فَاِذَاانْسَلَخَالۡاَشۡهُرُالۡحُـرُمُفَاقۡتُلُواالۡمُشۡرِكِيۡنَحَيۡثُوَجَدْتُّمُوۡهُمۡوَخُذُوۡهُمۡوَاحۡصُرُوۡهُمۡوَاقۡعُدُوۡالَهُمۡكُلَّمَرۡصَدٍ​ ۚفَاِنۡتَابُوۡاوَاَقَامُواالصَّلٰوةَوَاٰتَوُاالزَّكٰوةَفَخَلُّوۡاسَبِيۡلَهُمۡ​ ؕاِنَّاللّٰهَغَفُوۡرٌرَّحِيۡمٌ

मतलब: फिर, जब हराम (प्रतिष्ठित) महीने बीत जाएं तो मुशरिकों को जहां कहीं पाओ क़त्ल करो, उन्हें पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घात की जगह उनकी ताक में बैठो। फिर यदि वे तौबा कर लें और नमाज़ क़ायम करें और ज़कात दें तो उनका मार्ग छोड़ दो, निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है।

2- Verse 9 Surah 28 يٰۤاَيُّهَاالَّذِيۡنَاٰمَنُوۡۤااِنَّمَاالۡمُشۡرِكُوۡنَنَجَسٌفَلَايَقۡرَبُواالۡمَسۡجِدَالۡحَـرَامَبَعۡدَعَامِهِمۡهٰذَا​ ۚوَاِنۡخِفۡتُمۡعَيۡلَةًفَسَوۡفَيُغۡنِيۡكُمُاللّٰهُمِنۡفَضۡلِهٖۤاِنۡشَآءَ​ ؕاِنَّاللّٰهَعَلِيۡمٌحَكِيۡمٌ

मतलब: ऐ ईमान लानेवालो! मुशरिक तो बस अपवित्र ही हैं। अतः इस वर्ष के पश्चात वे मस्जिदे-हराम के पास न आएँ और यदि तुम्हें निर्धनता का भय हो तो आगे यदि अल्लाह चाहेगा तो तुम्हें अपने अनुग्रह से समृद्ध कर देगा. निश्चय ही अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, अत्यन्त तत्वदर्शी है।

3- Verse 4 Surah 101 وَاِذَاضَرَبۡتُمۡفِىالۡاَرۡضِفَلَيۡسَعَلَيۡكُمۡجُنَاحٌاَنۡتَقۡصُرُوۡامِنَالصَّلٰوةِ ​ۖاِنۡخِفۡتُمۡاَنۡيَّفۡتِنَكُمُالَّذِيۡنَكَفَرُوۡا​ ؕاِنَّالۡـكٰفِرِيۡنَكَانُوۡالَـكُمۡعَدُوًّامُّبِيۡنًا‏

मतलब: और जब तुम धरती में यात्रा करो, तो इसमें तुमपर कोई गुनाह नहीं कि नमाज़ को कुछ संक्षिप्त कर दो; यदि तुम्हें इस बात का भय हो कि विधर्मी लोग तुम्हें सताएंगे और कष्ट पहुंचाएंगे. निश्चय ही विधर्मी लोग तुम्हारे खुले शत्रु हैं।

4- Verse 9 Surah 123 يٰۤـاَيُّهَاالَّذِيۡنَاٰمَنُوۡاقَاتِلُواالَّذِيۡنَيَلُوۡنَكُمۡمِّنَالۡكُفَّارِوَلۡيَجِدُوۡافِيۡكُمۡغِلۡظَةً​ ؕوَاعۡلَمُوۡاۤاَنَّاللّٰهَمَعَالۡمُتَّقِيۡنَ

मतलब: ऐ ईमान लानेवालो! उन इनकार करनेवालों से लड़ो जो तुम्हारे निकट हैं और चाहिए कि वे तुममें सख़्ती पाएं, और जान रखो कि अल्लाह डर रखनेवालों के साथ है।

5- Verse 4 Surah 56 اِنَّالَّذِيۡنَكَفَرُوۡابِاٰيٰتِنَاسَوۡفَنُصۡلِيۡهِمۡنَارًاؕكُلَّمَانَضِجَتۡجُلُوۡدُهُمۡبَدَّلۡنٰهُمۡجُلُوۡدًاغَيۡرَهَالِيَذُوۡقُواالۡعَذَابَ​ ؕاِنَّاللّٰهَكَانَعَزِيۡزًاحَكِيۡمًا‏

मतलब: जिन लोगों ने हमारी आयतों का इनकार किया, उन्हें हम जल्द ही आग में झोंकेंगे। जब भी उनकी खालें पक जाएंगी, तो हम उन्हें दूसरी खालों में बदल दिया करेंगे, ताकि वे यातना का मज़ा चखते ही रहें. निस्संदेह अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।

6- Verse 9 Surah 23 يٰۤاَيُّهَاالَّذِيۡنَاٰمَنُوۡالَاتَتَّخِذُوۡۤااٰبَآءَكُمۡوَاِخۡوَانَـكُمۡاَوۡلِيَآءَاِنِاسۡتَحَبُّواالۡـكُفۡرَعَلَىالۡاِيۡمَانِ​ ؕوَمَنۡيَّتَوَلَّهُمۡمِّنۡكُمۡفَاُولٰۤـئِكَهُمُالظّٰلِمُوۡنَ‏

मतलब: ऐ ईमान लानेवालो! अपने बाप और अपने भाइयों को अपने मित्र न बनाओ यदि ईमान के मुक़ाबले में कुफ़्र उन्हें प्रिय हो. तुममें से जो कोई उन्हें अपना मित्र बनाएगा, तो ऐसे ही लोग अत्याचारी होंगे।

7- Verse 9 Surah 37 اِنَّمَاالنَّسِىۡٓءُزِيَادَةٌفِىالۡكُفۡرِ​ يُضَلُّبِهِالَّذِيۡنَكَفَرُوۡايُحِلُّوۡنَهٗعَامًاوَّيُحَرِّمُوۡنَهٗعَامًالِّيُوَاطِـُٔـوۡاعِدَّةَمَاحَرَّمَاللّٰهُفَيُحِلُّوۡامَاحَرَّمَاللّٰهُ​ ؕزُيِّنَلَهُمۡسُوۡۤءُاَعۡمَالِهِمۡ​ ؕوَاللّٰهُلَايَهۡدِىالۡقَوۡمَالۡـكٰفِرِيۡنَ

मतलब: (आदर के महीनों का) हटाना तो बस कुफ़्र में एक वृद्धि है, जिससे इनकार करनेवाले गुमराही में पड़ते हैं. किसी वर्ष वे उसे हलाल (वैध) ठहरा लेते हैं और किसी वर्ष उसको हराम ठहरा लेते हैं, ताकि अल्लाह के आदृत (महीनों) की संख्या पूरी कर लें, और इस प्रकार अल्लाह के हराम किए हुए को वैध ठहरा लें. उनके अपने बुरे कर्म उनके लिए सुहाने हो गए हैं और अल्लाह इनकार करनेवाले लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता।

8- Verse 5 Surah 57 يٰۤـاَيُّهَاالَّذِيۡنَاٰمَنُوۡالَاتَـتَّخِذُواالَّذِيۡنَاتَّخَذُوۡادِيۡنَكُمۡهُزُوًاوَّلَعِبًامِّنَالَّذِيۡنَاُوۡتُواالۡكِتٰبَمِنۡقَبۡلِكُمۡوَالۡـكُفَّارَاَوۡلِيَآءَ​ ۚوَاتَّقُوااللّٰهَاِنۡكُنۡتُمۡمُّؤۡمِنِيۡ

मतलब: ऐ ईमान लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे धर्म को हंसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ. और अल्लाह का डर रखो यदि तुम ईमानवाले हो।

9- Verse 33 Surah 61 مَّلۡـعُوۡنِيۡنَ ​ۛۚاَيۡنَمَاثُقِفُوۡۤااُخِذُوۡاوَقُتِّلُوۡاتَقۡتِيۡلً

मतलब: फिटकारे हुए होंगे. जहाँ कहीं पाए गए पकड़े जाएंगे और बुरी तरह जान से मारे जाएंगे।

10- Verse 21 Surah 98 اِنَّكُمۡوَمَاتَعۡبُدُوۡنَمِنۡدُوۡنِاللّٰهِحَصَبُجَهَـنَّمَؕاَنۡـتُمۡلَهَاوَارِدُوۡنَ

मतलब: निश्चय ही तुम और वह कुछ जिनको तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते हो सब जहन्नम के ईधन हो. तुम उसके घाट उतरोगे।

11- Verse 32 Surah 22 وَمَنۡاَظۡلَمُمِمَّنۡذُكِّرَبِاٰيٰتِرَبِّهٖثُمَّاَعۡرَضَعَنۡهَا​ؕاِنَّامِنَالۡمُجۡرِمِيۡنَمُنۡتَقِمُوۡنَ

मतलब: और उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कौन होगा जिसे उसके रब की आयतों के द्वारा याद दिलाया जाए,फिर वह उनसे मुंह फेर ले? निश्चय ही हम अपराधियों से बदला लेकर रहेंगे।

12- Verse 48 Surah 20 وَعَدَكُمُاللّٰهُمَغَانِمَكَثِيۡرَةًتَاۡخُذُوۡنَهَافَعَجَّلَلَكُمۡهٰذِهٖوَكَفَّاَيۡدِىَالنَّاسِعَنۡكُمۡ​ۚوَلِتَكُوۡنَاٰيَةًلِّلۡمُؤۡمِنِيۡنَوَيَهۡدِيَكُمۡصِرَاطًامُّسۡتَقِيۡمًاۙ

मतलब: अल्लाह ने तुमसे बहुत-सी गनीमतों का वादा किया है, जिन्हें तुम प्राप्त करोगे. यह विजय तो उसने तुम्हें तात्कालिक रूप से निश्चित कर दी और लोगों के हाथ तुमसे रोक दिए (कि वे तुमपर आक्रमण करने का साहस न कर सकें) और ताकि ईमानवालों के लिए एक निशानी हो. और वह सीधे मार्ग की ओर तुम्हारा मार्गदर्शन करे।

13- Verse 8 Surah 69 فَكُلُوۡامِمَّاغَنِمۡتُمۡحَلٰلاًطَيِّبًاۖوَّاتَّقُوااللّٰهَ​ ؕاِنَّاللّٰهَغَفُوۡرٌرَّحِيۡمٌ

मतलब: अतः जो कुछ ग़नीमत का माल तुमने प्राप्त किया है, उसे वैध-पवित्र समझकर खाओ और अल्लाह का डर रखो. निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है।

14- Verse 66 Surah 9يٰۤاَيُّهَاالنَّبِىُّجَاهِدِالۡكُفَّارَوَالۡمُنٰفِقِيۡنَوَاغۡلُظۡعَلَيۡهِمۡ​ؕوَمَاۡوٰٮهُمۡجَهَنَّمُ​ؕوَبِئۡسَالۡمَصِيۡرُ ‏

मतलब: ऐ नबी! इनकार करनेवालों और कपटाचारियों से जिहाद करो और उनके साथ सख़्ती से पेश आओ। उनका ठिकाना जहन्नम है और वह अन्ततः पहुंचने की बहुत बुरी जगह है।

15- Verse 41 Surah 27 فَلَـنُذِيۡقَنَّالَّذِيۡنَكَفَرُوۡاعَذَابًاشَدِيۡدًاۙوَّلَنَجۡزِيَنَّهُمۡاَسۡوَاَالَّذِىۡكَانُوۡايَعۡمَلُوۡنَ‏

मतलब: अतः हम अवश्य ही उन लोगों को, जिन्होंने इनकार किया, कठोर यातना का मज़ा चखाएँगे, और हम अवश्य उन्हें उसका बदला देंगे जो निकृष्टतम कर्म वे करते रहे हैं।

16- Verse 41 Surah 28 ذٰلِكَجَزَآءُاَعۡدَآءِاللّٰهِالنَّارُ​ ۚلَهُمۡفِيۡهَادَارُالۡخُـلۡدِ​ ؕجَزَآءًۢبِمَاكَانُوۡابِاٰيٰتِنَايَجۡحَدُوۡنَ‏

मतलब: वह है अल्लाह के शत्रुओं का बदला – आग. उसी में उनका सदा का घर है, उसके बदले में जो वे हमारी आयतों का इनकार करते रहे।

17- Verse 9 Surah 111 اِنَّاللّٰهَاشۡتَرٰىمِنَالۡمُؤۡمِنِيۡنَاَنۡفُسَهُمۡوَاَمۡوَالَهُمۡبِاَنَّلَهُمُالۡجَـنَّةَ​ ؕيُقَاتِلُوۡنَفِىۡسَبِيۡلِاللّٰهِفَيَقۡتُلُوۡنَوَيُقۡتَلُوۡنَ​وَعۡدًاعَلَيۡهِحَقًّافِىالتَّوۡرٰٮةِوَالۡاِنۡجِيۡلِوَالۡقُرۡاٰنِ​ ؕوَمَنۡاَوۡفٰىبِعَهۡدِهٖمِنَاللّٰهِفَاسۡتَـبۡشِرُوۡابِبَيۡعِكُمُالَّذِىۡبَايَعۡتُمۡبِهٖ​ؕوَذٰلِكَهُوَالۡفَوۡزُالۡعَظِيۡمُ

मतलब: निस्संदेह अल्लाह ने ईमानवालों से उनके प्राण और उनके माल इसके बदले में ख़रीद लिए हैं कि उनके लिए जन्नत है। वे अल्लाह के मार्ग में लड़ते हैं, तो वे मारते भी हैं और मारे भी जाते हैं। यह उसके ज़िम्मे तौरात, इनजील और क़ुरआन में (किया गया) एक पक्का वादा है और अल्लाह से बढ़कर अपने वादे को पूरा करनेवाला हो भी कौन सकता है ? अतः अपने उस सौदे पर खु़शियाँ मनाओ, जो सौदा तुमने उससे किया है। और यही सबसे बड़ी सफलता है।

18- Verse 9 Surah 58 وَمِنۡهُمۡمَّنۡيَّلۡمِزُكَفِىالصَّدَقٰتِ​ ۚفَاِنۡاُعۡطُوۡامِنۡهَارَضُوۡاوَاِنۡلَّمۡيُعۡطَوۡامِنۡهَاۤاِذَاهُمۡيَسۡخَطُوۡنَ‏

मतलब: और उनमें से कुछ लोग सदक़ों के विषय में तुम पर चोटें करते हैं. किन्तु यदि उन्हें उसमें से दे दिया जाए तो प्रसन्न हो जाएँ और यदि उन्हें उसमें से न दिया गया तो क्या देखोगे कि वे क्रोधित होने लगते हैं।

19- Verse 8 Surah 65 يٰۤـاَيُّهَاالنَّبِىُّحَرِّضِالۡمُؤۡمِنِيۡنَعَلَىالۡقِتَالِ​ ؕاِنۡيَّكُنۡمِّنۡكُمۡعِشۡرُوۡنَصَابِرُوۡنَيَغۡلِبُوۡامِائَتَيۡنِ​ ۚوَاِنۡيَّكُنۡمِّنۡكُمۡمِّائَةٌيَّغۡلِبُوۡۤااَلۡفًامِّنَالَّذِيۡنَكَفَرُوۡابِاَنَّهُمۡقَوۡمٌلَّايَفۡقَهُوۡنَ

मतलब: ऐ नबी! मोमिनों को जिहाद पर उभारो। यदि तुम्हारे बीस आदमी जमे होंगे, तो वे दो सौ पर प्रभावी होंगे और यदि तुममें से ऐसे सौ होंगे तो वे इनकार करनेवालों में से एक हज़ार पर प्रभावी होंगे, क्योंकि वे नासमझ लोग हैं।

20- Verse 5 Surah 51 يٰۤـاَيُّهَاالَّذِيۡنَاٰمَنُوۡالَاتَتَّخِذُواالۡيَهُوۡدَوَالنَّصٰرٰۤىاَوۡلِيَآءَ ​ۘبَعۡضُهُمۡاَوۡلِيَآءُبَعۡضٍ​ؕوَمَنۡيَّتَوَلَّهُمۡمِّنۡكُمۡفَاِنَّهٗمِنۡهُمۡ​ؕاِنَّاللّٰهَلَايَهۡدِىالۡقَوۡمَالظّٰلِمِيۡنَ

मतलब: ऐ ईमान लानेवालो! तुम यहूदियों और ईसाइयों को अपना मित्र (राज़दार) न बनाओ. वे (तुम्हारे विरुद्ध) परस्पर एक-दूसरे के मित्र हैं. तुममें से जो कोई उनको अपना मित्र बनाएगा, वह उन्हीं लोगों में से होगा. निस्संदेह अल्लाह अत्याचारियों को मार्ग नहीं दिखाता।

21- Verse 9 Surah 29 قَاتِلُواالَّذِيۡنَلَايُؤۡمِنُوۡنَبِاللّٰهِوَلَابِالۡيَوۡمِالۡاٰخِرِوَلَايُحَرِّمُوۡنَمَاحَرَّمَاللّٰهُوَرَسُوۡلُهٗوَلَايَدِيۡنُوۡنَدِيۡنَالۡحَـقِّمِنَالَّذِيۡنَاُوۡتُواالۡـكِتٰبَحَتّٰىيُعۡطُواالۡجِزۡيَةَعَنۡيَّدٍوَّهُمۡصٰغِرُوۡنَ

मतलब: वे किताबवाले जो न अल्लाह पर ईमान रखते हैं और न अन्तिम दिन पर और न अल्लाह और उसके रसूल के हराम ठहराए हुए को हराम ठहराते हैं और न सत्यधर्म का अनुपालन करते हैं, उनसे लड़ो, यहां तक कि वे सत्ता से विलग होकर और छोटे (अधीनस्थ) बनकर जिज़्या देने लगें।

22- Verse 5 Surah 14 وَمِنَالَّذِيۡنَقَالُوۡۤااِنَّانَصٰرٰٓىاَخَذۡنَامِيۡثَاقَهُمۡفَنَسُوۡاحَظًّامِّمَّاذُكِّرُوۡابِهٖفَاَغۡرَيۡنَابَيۡنَهُمُالۡعَدَاوَةَوَالۡبَغۡضَآءَاِلٰىيَوۡمِالۡقِيٰمَةِ​ ؕوَسَوۡفَيُنَبِّئُهُمُاللّٰهُبِمَاكَانُوۡايَصۡنَعُوۡنَ‏

मतलब: और हमने उन लोगों से भी दृढ़ वचन लिया था, जिन्होंने कहा था कि हम नसारा (ईसाई) हैं, किन्तु जो कुछ उन्हें जिसके द्वारा याद कराया गया था उसका एक बड़ा भाग भुला बैठे. फिर हमने उनके बीच क़ियामत तक के लिए शत्रुता और द्वेष की आग भड़का दी, और अल्लाह जल्द उन्हें बता देगा, जो कुछ वे बनाते रहे थे।

23- Verse 4 Surah 89 وَدُّوۡالَوۡتَكۡفُرُوۡنَكَمَاكَفَرُوۡافَتَكُوۡنُوۡنَسَوَآءً​ فَلَاتَتَّخِذُوۡامِنۡهُمۡاَوۡلِيَآءَحَتّٰىيُهَاجِرُوۡافِىۡسَبِيۡلِاللّٰهِ​ ؕفَاِنۡتَوَلَّوۡافَخُذُوۡهُمۡوَاقۡتُلُوۡهُمۡحَيۡثُوَجَدتُّمُوۡهُمۡ​وَلَاتَتَّخِذُوۡامِنۡهُمۡوَلِيًّاوَّلَانَصِيۡرًا

मतलब: वे तो चाहते हैं कि जिस प्रकार वे स्वयं अधर्मी हैं, उसी प्रकार तुम भी अधर्मी बनकर उन जैसे हो जाओ; तो तुम उनमें से अपने मित्र न बनाओ, जब तक कि वे अल्लाह के मार्ग में घर-बार न छोड़ें. फिर यदि वे इससे पीठ फेरें तो उन्हें पकड़ो, और उन्हें क़त्ल करो जहां कहीं भी उन्हें पाओ – तो उनमें से किसी को न अपना मित्र बनाना और न सहायक ।

24- Verse 9 Surah 14قَاتِلُوۡهُمۡيُعَذِّبۡهُمُاللّٰهُبِاَيۡدِيۡكُمۡوَيُخۡزِهِمۡوَيَنۡصُرۡكُمۡعَلَيۡهِمۡوَيَشۡفِصُدُوۡرَقَوۡمٍمُّؤۡمِنِيۡنَۙ ‏

मतलब: उनसे लड़ो। अल्लाह तुम्हारे हाथों से उन्हें यातना देगा और उन्हें अपमानित करेगा और उनके मुक़ाबले में वह तुम्हारी सहायता करेगा. और ईमानवाले लोगों के दिलों का दुखमोचन करेगा।

25- Verse 3 Surah 151 سَنُلۡقِىۡفِىۡقُلُوۡبِالَّذِيۡنَكَفَرُواالرُّعۡبَبِمَاۤاَشۡرَكُوۡابِاللّٰهِمَالَمۡيُنَزِّلۡبِهٖسُلۡطٰنًا ​​ۚوَمَاۡوٰٮهُمُالنَّارُ​ؕوَبِئۡسَمَثۡوَىالظّٰلِمِيۡنَ

मतलब: हम शीघ्र ही इनकार करनेवालों के दिलों में धाक बिठा देंगे, इसलिए कि उन्होंने ऐसी चीज़ों को अल्लाह का साक्षी ठहराया है जिनके साथ उसने कोई सनद नहीं उतारी, और उनका ठिकाना आग (जहन्नम) है और अत्याचारियों का क्या ही बुरा ठिकाना है।

26- Verse 2 Surah 191 وَاقۡتُلُوۡهُمۡحَيۡثُثَقِفۡتُمُوۡهُمۡوَاَخۡرِجُوۡهُمۡمِّنۡحَيۡثُاَخۡرَجُوۡكُمۡ​ وَالۡفِتۡنَةُاَشَدُّمِنَالۡقَتۡلِۚوَلَاتُقٰتِلُوۡهُمۡعِنۡدَالۡمَسۡجِدِالۡحَـرَامِحَتّٰىيُقٰتِلُوۡكُمۡفِيۡهِ​ۚفَاِنۡقٰتَلُوۡكُمۡفَاقۡتُلُوۡهُمۡؕكَذٰلِكَجَزَآءُالۡكٰفِرِيۡنَ

मतलब: और जहां कहीं उनपर क़ाबू पाओ, क़त्ल करो और उन्हें निकालो जहां से उन्होंने तुम्हें निकाला है, इसलिए कि फ़ितना (उपद्रव) क़त्ल से भी बढ़कर गम्भीर है. लेकिन मस्जिदे-हराम (काबा) के निकट तुम उनसे न लड़ो जब तक कि वे स्वयं तुमसे वहां युद्ध न करें। अतः यदि वे तुमसे युद्ध करें तो उन्हें क़त्ल करो – ऐसे इनकारियों का ऐसा ही बदला है।

(इन 26 आयतों का हिंदी अनुवाद Quraninhindi.com से लिया गया है)🙏🏻

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IN TELUGU

ఖురాన్ లోని 26 శ్లోకాలను తొలగించాలని మాజీ షియా వక్ఫ్ బోర్డు చైర్మన్ వసీం రిజ్వి వసీం రిజ్వి భారత సుప్రీంకోర్టులో సుప్రీంకోర్టులో పిల్ దాఖలు చేశారు. రిజ్వి యొక్క ఈ డిమాండ్ వేరే రకమైన చర్చకు దారితీసింది. రిజ్వి ప్రకారం, ఖురాన్ యొక్క ఈ శ్లోకాల ద్వారా దేశం యొక్క ఐక్యత, సమగ్రత మరియు సోదరభావం ముప్పు పొంచి ఉన్నాయి.ఈ అంశానికి వెళ్ళే ముందు, ఆ 26 శ్లోకాలలో ఏమి ఉందో మాకు తెలియజేయండి, వీటిని వాసిమ్ రిజ్వి అని పిలుస్తారు. పిఐఎల్ ప్రకారం, ఈ శ్లోకాలు ప్రతికూలంగా ఉంటాయి మరియు హింస మరియు ద్వేషాన్ని ప్రోత్సహిస్తాయి.

ఇవి 26 శ్లోకాలు
1 పద్యం 9 సూరా 5 فاذاانسلخالاشهرالحرمفاقتلواالمشركينحيثوجدتموهموخذوهمواحصروهمواقعدوالهمكلمرصد فانتابواواقامواالصلوةواتواالزكوةفخلواسبيلهم

అర్థం: అప్పుడు, హరామ్ (ప్రఖ్యాత) నెల ముగిసినప్పుడు, ముషారికులను వారు కనుగొన్న చోట చంపండి, వారిని పట్టుకుని చుట్టుముట్టండి మరియు ప్రతి ఆకస్మిక ప్రదేశంలో వారి చూపులలో కూర్చోండి. అప్పుడు వారు ఆగి నమాజ్ చేసి జకాత్ అర్పిస్తే, వారి మార్గాన్ని వదిలివేస్తే, ఖచ్చితంగా అల్లాహ్ చాలా క్షమించేవాడు, దయగలవాడు.

2 పద్యం 9 సూరా 28 يايهاالذينامنواانماالمشركوننجسفلايقربواالمسجدالحرامبعدعامهمهذا وانخفتمعيلةفسوفيغنيكماللهمنفضلهانشآء

అర్థం: ఓ విశ్వాసులారా! ముష్రిక్ కేవలం అపవిత్రుడు. అందువల్ల, ఈ సంవత్సరం తరువాత, వారు మసీదు-హరామ్ దగ్గరకు రాకూడదు మరియు మీరు పేదరికానికి భయపడితే, మీరు కోరుకుంటే అల్లాహ్ మీ దయ ద్వారా మిమ్మల్ని ధనవంతుడు చేస్తాడు. ఖచ్చితంగా అల్లాహ్ అన్ని విషయాలను తెలుసుకొనేవాడు, చాలా మెటాఫిజికల్.

3 పద్యం 4 సూరా 101 واذاضربتمفىالارضفليسعليكمجناحانتقصروامنالصلوة انخفتمانيفتنكمالذينكفروا

అర్థం: మరియు మీరు భూమిలో ప్రయాణించేటప్పుడు, ప్రార్థనను ఇరుకైనదిగా చేయడానికి మీలో ఎటువంటి నేరం లేదు; మతవిశ్వాసులు మిమ్మల్ని హింసించి మీకు ఇబ్బంది కలిగిస్తారని మీరు భయపడితే. ఖచ్చితంగా మతవిశ్వాసులు మీ బహిరంగ శత్రువులు.

4 పద్యం 9 సూరా 123 يايهاالذينامنواقاتلواالذينيلونكممنالكفاروليجدوافيكمغلظة

అర్థం: ఓ విశ్వాసులారా! మీ దగ్గరున్న వారితో పోరాడండి మరియు వారు మీలో బలంగా ఉండాలని కోరుకుంటారు, మరియు భయపడే వారితో అల్లాహ్ ఉన్నారని తెలుసుకోండి.

5- పద్యం 4 సూరా 56 انالذينكفروابايتناسوفنصليهمناراكلمانضجتجلودهمبدلنهمجلوداغيرهاليذوقواالعذاب

అర్థం: మన శ్లోకాలను తిరస్కరించే వారు, త్వరలోనే వాటిని అగ్నిలో పడవేస్తాము. వారి తొక్కలు వండినప్పుడల్లా, మేము వాటిని ఇతర తొక్కలుగా మారుస్తాము, తద్వారా వారు హింసను రుచి చూస్తూ ఉంటారు. నిస్సందేహంగా అల్లాహ్ ఆధిపత్యం, దూరదృష్టి గలవాడు.

6- పద్యం 9 సూరా 23 يايهاالذينامنوالاتتخذواابآءكمواخوانكماوليآءاناستحبواالكفرعلىالايمان

అర్థం: ఓ విశ్వాసులారా! మీ తండ్రి మరియు మీ సోదరులు విశ్వాసం ఎదుట మీకు ప్రియమైన వారిని మీ స్నేహితులుగా చేయవద్దు. మీలో ఎవరైనా వారిని మీ స్నేహితునిగా చేస్తే, అలాంటి వ్యక్తులు నిరంకుశంగా ఉంటారు.

7- 9 వ వచనం సూరా 37 انماالنسىءزيادةفىالكفر يضلبهالذينكفروايحلونهعاماويحرمونهعاماليواطواعدةماحرماللهفيحلواماحرمالله زينلهمسوءاعمالهم

అర్థం: తొలగింపు (గౌరవ నెలలు) కేవలం కుఫ్ర్లో పెరుగుదల, దీని నుండి తిరస్కరించేవారు చిగుళ్ళలో పడతారు. ఏదో ఒక రోజు వారు అతన్ని హలాల్ (చట్టబద్ధం) గా చేస్తారు మరియు కొంత సంవత్సరంలో అతన్ని హరామ్ చేస్తారు, తద్వారా అల్లాహ్ యొక్క అధిత్ (నెలలు) సంఖ్య నెరవేరుతుంది, తద్వారా అల్లాహ్ యొక్క హరామ్ను ధృవీకరిస్తుంది. వారి స్వంత చెడు పనులు వారికి ఆహ్లాదకరంగా మారాయి మరియు నిరాకరించేవారికి అల్లాహ్ ప్రత్యక్ష మార్గాన్ని చూపించడు.

8- పద్యం 5 సూరా 57 يايهاالذينامنوالاتتخذواالذيناتخذوادينكمهزواولعبامنالذيناوتواالكتبمنقبلكموالكفاراوليآء

అర్థం: ఓ విశ్వాసులారా! మీ ముందు పుస్తకాన్ని ఇచ్చిన వారు, మీ మతాన్ని నవ్వించేవారు, దానిని తిరస్కరించే వారిని మీ స్నేహితుడిగా చేయరు. మీరు చిత్తశుద్ధి ఉంటే అల్లాహ్కు భయపడండి.

9- పద్యం 33 సూరా 61 مَّلۡـعُوۡنِيۡنَ

అర్థం: ఫిట్గా ఉండాలి. ఎక్కడ దొరికితే వారు పట్టుబడతారు మరియు తీవ్రంగా చంపబడతారు.

10- 21 వ వచనం సూరా 98

అర్థం: ఖచ్చితంగా మీరు మరియు అల్లాహ్ తప్ప మీరు ఆరాధించే కొద్దిమంది, అందరూ ఆత్మకు ఇంధనం. మీరు పైర్ కి వస్తారు.

11- 32 వ వచనం సూరా 22 وَمَنۡاَظۡلَمُمِمَّنۡذُكِّرَبِاٰيٰتِرَبِّهٖثُمَّاَعۡرَضَعَنۡهَا

అర్థం: మరియు తన ప్రభువు యొక్క శ్లోకాల ద్వారా గుర్తుకు తెచ్చుకున్న వ్యక్తి కంటే ఎవరు ఎక్కువ దౌర్జన్యం చేస్తారు, అప్పుడు అతను వారి నుండి తప్పుకుంటాడు? ఖచ్చితంగా మేము నేరస్థులపై ప్రతీకారం తీర్చుకుంటాము అవును.

12 పద్యం 48 సూరా 20 وعدكماللهمغانمكثيرةتاخذونهافعجللكمهذهوكفايدىالناسعنكم

అర్థం: అల్లాహ్ మీకు అనేక బహుమతులు వాగ్దానం చేసాడు, అది మీకు లభిస్తుంది. ఈ విజయం మిమ్మల్ని తక్షణమే నిర్ధారిస్తుంది మరియు ప్రజల చేతులను ఆపివేసింది (తద్వారా వారు మీపై దాడి చేయడానికి ధైర్యం చేయలేరు) మరియు ఇది విశ్వాసులకు టోకెన్. మరియు అతను మిమ్మల్ని నేరుగా మార్గంలోకి నడిపిస్తాడు.

13- 8 వ వచనం సూరా 69 فَكُلُوۡامِمَّاغَنِمۡتُمۡحَلٰلاًطَيِّبًاۖوَّاتَّقُوااللّٰهَ

అర్థం: కాబట్టి, మీ డబ్బు కోసం మీరు ఏ వస్తువులను స్వీకరించినా, దానిని చట్టబద్ధంగా మరియు పవిత్రంగా తినండి మరియు అల్లాహ్ పట్ల భయపడండి. ఖచ్చితంగా అల్లాహ్ చాలా క్షమించేవాడు, చాలా దయగలవాడు.

14- పద్యం 66 సూరా 9 يٰۤاَيُّهَاالنَّبِىُّجَاهِدِالۡكُفَّارَوَالۡمُنٰفِقِيۡنَوَاغۡلُظۡعَلَيۡهِمۡ

అర్థం: ఓ ప్రవక్త! నిరాకరించేవారికి మరియు కపటాలకు జిహాద్ మరియు వారితో కఠినంగా వ్యవహరించండి. అతని స్థానం జహన్నం మరియు చివరకు అతను చేరుకోవడానికి చాలా చెడ్డ ప్రదేశం.

15- 41 వ వచనం 27

అర్థం: కాబట్టి మేము దానిని తిరస్కరించేవారి యొక్క కఠినమైన హింసను ఖచ్చితంగా ఆనందిస్తాము మరియు వారు చేస్తున్న చెత్త పనులకు ప్రతీకారం తీర్చుకుంటాము.

16- 41 వ సూత్రం 28 ذٰلِكَجَزَآءُاَعۡدَآءِاللّٰهِالنَّارُ

అర్థం: ఇది అల్లాహ్ యొక్క శత్రువుల ప్రతీకారం – అగ్ని. అందులో, వారు మన శ్లోకాలను నిరాకరించిన దానికి బదులుగా వారికి నిత్య గృహం ఉంది.

17 పద్యం 9 సూరా 111 اناللهاشترىمنالمؤمنينانفسهمواموالهمبانلهمالجنة يقاتلونفىسبيلاللهفيقتلونويقتلون وعداعليهحقافىالتورٮةوالانجيلوالقران

అర్థం: నిస్సందేహంగా అల్లాహ్ వారి ఆత్మలను మరియు వారి వస్తువులను విశ్వాసుల నుండి కొనుగోలు చేసాడు, వారికి స్వర్గం ఉందని. వారు అల్లాహ్ మార్గంలో పోరాడుతారు, చంపేస్తారు మరియు చంపబడతారు. ఇది అతని బాధ్యత, తౌరత్, ఇంజిల్ మరియు ఖురాన్లలో ఖచ్చితంగా ఇచ్చిన వాగ్దానం (మరియు) మరియు అల్లాహ్ కంటే తన వాగ్దానాన్ని ఎవరు నెరవేర్చగలరు? కాబట్టి మీ ఒప్పందాన్ని, మీరు అతనితో చేసుకున్న ఒప్పందాన్ని జరుపుకోండి. మరియు ఇది అతిపెద్ద విజయం.

18- 9 వ వచనం సూరా 58 وَمِنۡهُمۡمَّنۡيَّلۡمِزُكَفِىالصَّدَقٰتِ

అర్థం: మరియు వారిలో కొందరు సదాకుల గురించి మీకు బాధ కలిగించారు. కానీ వారు దాని నుండి ఇవ్వబడితే, అప్పుడు వారు సంతోషంగా ఉంటారు మరియు దాని నుండి ఇవ్వకపోతే, వారు కోపం తెచ్చుకోవడం మీరు చూస్తారు.

19 పద్యం 8 సూరా 65 يايهاالنبىحرضالمؤمنينعلىالقتال انيكنمنكمعشرونصابرونيغلبوامائتين

అర్థం: ఓ ప్రవక్త! జిహాద్లో మోమినన్లను తరలించండి. మీ పురుషులలో ఇరవై మంది స్తంభింపజేస్తే, వారు రెండు వందల వద్ద ప్రభావవంతంగా ఉంటారు, మరియు మీలో వంద మంది ఉంటే, వారు నిరాకరించిన వారిలో వెయ్యి మందికి ప్రభావవంతంగా ఉంటారు, ఎందుకంటే వారు మూర్ఖులు.

20 పద్యం 5 సూరా 51 يايهاالذينامنوالاتتخذوااليهودوالنصرىاوليآء بعضهماوليآءبعض ومنيتولهممنكمفانهمنهم

అర్థం: ఓ విశ్వాసులారా! యూదులను, క్రైస్తవులను మీ స్నేహితుడిగా చేయవద్దు (రజ్దార్). వారు (మీకు వ్యతిరేకంగా) ఒకరికొకరు స్నేహితులు. మీలో ఎవరైతే అతన్ని తన స్నేహితునిగా చేస్తారో, అతను ఆ ప్రజలలో ఉంటాడు. అల్లాహ్ అణచివేతదారులకు మార్గం చూపించడు.

21 పద్యం 9 సూరా 29

అర్థం: అల్లాహ్ మీద లేదా చివరి రోజున, చివరి రోజున, లేదా అల్లాహ్ మరియు అతని దూతతో సామరస్యంగా నమ్మని వారు సత్యధర్మను అనుసరించరు, వారితో పోరాడతారు, వారు కూడా శక్తి నుండి వేరు చేయబడ్డారు మరియు చిన్న (అధీనంలో ) జిజ్యా.

22 పద్యం 5 సూరా 14 ومنالذينقالواانانصرىاخذناميثاقهمفنسواحظامماذكروابهفاغرينابينهمالعداوةوالبغضآءالىيومالقيمة

అర్థం: మరియు మేము నసారా (క్రైస్తవులు) అని చెప్పిన వారి నుండి కూడా మేము బలమైన వాగ్దానం చేసాము, కాని వారు గుర్తుచేసుకున్న వాటిలో ఎక్కువ భాగాన్ని మరచిపోండి. అప్పుడు మేము గంట చివరి వరకు వారి మధ్య శత్రుత్వం మరియు శత్రుత్వాన్ని రేకెత్తించాము మరియు వారు ఏమి చేస్తున్నారో అల్లాహ్ వారికి త్వరలో తెలియజేస్తాడు.

23 పద్యం 4 సూరా 89 ودوالوتكفرونكماكفروافتكونونسوآء فلاتتخذوامنهماوليآءحتىيهاجروافىسبيلالله فانتولوافخذوهمواقتلوهمحيثوجدتموهم نهمولياولانصيرا

అర్థం: వారు అన్యాయంగా ఉన్నట్లే మీరు కూడా వారిలాగే ఉండాలని వారు కోరుకుంటారు; కాబట్టి మీ స్నేహితులను అల్లాహ్ మార్గంలో వదిలివేస్తే తప్ప వారిలో వారిని చేయవద్దు. అప్పుడు వారు దానిపై తిరగబడితే, వారిని పట్టుకుని, దొరికిన చోట చంపండి – వారిలో ఇద్దరూ మీ స్నేహితుడిని లేదా సహాయకుడిని చేయరు.

24- 9 వ వచనం 14

అర్థం: వారితో పోరాడండి. అల్లాహ్ మీ చేతులతో వారిని హింసించి అవమానిస్తాడు మరియు వారికి వ్యతిరేకంగా అతను మీకు సహాయం చేస్తాడు. మరియు నమ్మిన వారి హృదయాలను దు rie ఖిస్తుంది.

25- 3 వ వచనం 151 سَنُلۡقِىۡفِىۡقُلُوۡبِالَّذِيۡنَكَفَرُواالرُّعۡبَبِمَاۤاَشۡرَكُوۡابِاللّٰهِمَالَمۡيُنَزِّلۡبِهٖسَمٰٮُنُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُُ

అర్థం: మేము దానిని ఖండించిన వారి హృదయాలలో త్వరలోనే తాకుతాము, ఎందుకంటే వారు అల్లాహ్ యొక్క సాక్షి వంటి వాటిని ప్రకటించారు, దానితో వారు శాంతి చేయలేదు, మరియు వారు ఆచూకీ అగ్ని (జహన్నం) మరియు వారికి చెడ్డ ప్రదేశం అణచివేతలు.

26 పద్యం 2 సూరా 191 واقتلوهمحيثثقفتموهمواخرجوهممنحيثاخرجوكم والفتنةاشدمنالقتلولاتقتلوهمعندالمسجدالحرامحتىيقتلوكمفيه

అర్థం: మీరు వాటిని నియంత్రించగలిగిన చోట, వారిని చంపి, వారు మిమ్మల్ని బయటకు తీసుకెళ్లిన చోటు నుండి బయటకు తీసుకెళ్లండి, ఎందుకంటే ఫిట్నా (విసుగు) హత్య కంటే తీవ్రమైనది. కానీ మసీదు-హరామ్ (కాబా) దగ్గర మీరు వారితో పోరాడకూడదు తప్ప అక్కడ వారు మీతో పోరాడరు. కాబట్టి వారు మీతో పోరాడితే, వారిని చంపండి – అలాంటి తిరస్కరణలు ఇలా మారాయి

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BENGALI

শিয়া ওয়াকফ বোর্ডের প্রাক্তন চেয়ারম্যান ওয়াসিম রিজভী ওয়াসিম রিজভী কোরআনের ২ 26 টি আয়াত অপসারণের জন্য ভারতের সুপ্রিম কোর্ট সুপ্রিম কোর্টে পিআইএল দায়ের করেছেন। রিজভীর এই দাবিটি এক অন্য ধরণের বিতর্কের জন্ম দিয়েছে। রিজভির মতে, কুরআনের এই আয়াতগুলির দ্বারা দেশের ,ক্য, অখণ্ডতা এবং ভ্রাতৃত্ব হুমকির সম্মুখীন হয়েছে।এই বিষয়টিতে যাওয়ার আগে আসুন জেনে নেওয়া যাক সেই ২ verses টি আয়াতে কী আছে, যার কারণে তারা ওয়াসিম রিজভিকে বিতর্কিত বলা হয়। পিআইএল-এর মতে এই পদগুলি নেতিবাচক এবং হিংসা ও বিদ্বেষ প্রচার করে।

এই 26 পদ
1 আয়াত 9 সূরা 5 فاذاانسلخالاشهرالحرمفاقتلواالمشركينحيثوجدتموهموخذوهمواحصروهمواقعدوالهمكلمرصد فانتابواواقامواالصلوةواتواالزكوففلواسبيلهم اناللهغفوررحيم

অর্থ: তারপরে হারাম (বিশিষ্ট) মাস শেষ হয়ে গেলে মুশারিকদের যেখানেই পাওয়া যাবে সেখানে হত্যা করুন, তাদের ধরে ফেলুন এবং তাদের চারপাশে ঘেরাও করুন এবং প্রতিটি আক্রমণাত্মক স্থানে তাদের দৃষ্টিতে বসে থাকুন। অতঃপর যদি তারা থামে নামাজ আদায় করে এবং যাকাত দেয় তবে তাদের পথ ছেড়ে দিন, নিশ্চয় আল্লাহ অত্যন্ত ক্ষমাশীল, দয়ালু।

2 আয়াত 9 সূরা 28 يايهاالذينامنواانمالمشركوننجسفلايقربواالمسجدالحرامبعدعامهمهذا وانخفتمعيلةفسوفيغنيكماللهمنفضلهانشآء اناللهعليمحكيم

অর্থ: হে মুমিনগণ! মুশরিক কেবল অপরিষ্কার। অতএব, এই বছরের পরে তারা যেন মসজিদ-হারামের নিকটে না আসে এবং আপনি যদি দারিদ্র্যের ভয়ে ভীত হন তবে আপনি চাইলে আল্লাহ আপনাকে আপনার অনুগ্রহে ধনী করে তুলবেন। নিশ্চয়ই আল্লাহ সর্ববিষয়ে জ্ঞানী, অত্যন্ত রূপক।

3 আয়াত 4 সূরা 101 واذاضربتمفىالارضفليسعليكمجناهنتقصروامنالصلوة خانخفتمانيفتنكمالذينكفروا انالكفرينكانوالكمعدوامبينا

অর্থ: এবং যখন তোমরা পৃথিবীতে ভ্রমণ কর, তখন নামাযকে সংকীর্ণ করার কোন অপরাধ তোমার মধ্যে নেই; যদি আপনি ভীত হন যে ধর্মবিরোধীরা আপনাকে তাড়িত করবে এবং আপনাকে সমস্যার কারণ করবে। নিশ্চয় ধর্মবিরোধীরা আপনার প্রকাশ্য শত্রু।

4 আয়াত 9 সূরা 123 يايهاالذينامنواقاتلواالذينيلونكممنالكفاروليجدوافيكمغلظة واعلموااناللهمعالمتقين

অর্থ: হে মুমিনগণ! যারা আপনার নিকটবর্তী তাদের সাথে লড়াই করুন এবং চান যে তারা আপনার মধ্যে দৃ be় হোক এবং জেনে রাখুন যে আল্লাহ ভয় করেন তাদের সাথে রয়েছেন।

5- আয়াত 4 সূরা 56 انالذينكفروابايتناسوفنصليهمناراكلمانضجتجلودهمبدلنهمجلوداغيرهاليذوقواالعذاب اناللهكانعزيزاحكيما

অর্থ: যারা আমাদের আয়াতকে অস্বীকার করে, আমরা শীঘ্রই তাদেরকে আগুনে নিক্ষেপ করব। যখনই তাদের স্কিন রান্না করা হবে, আমরা তাদের অন্যান্য স্কিনে রূপান্তর করব, যাতে তারা অত্যাচারের স্বাদ গ্রহণ করতে থাকবে। নিঃসন্দেহে আল্লাহই সর্বশক্তিমান, দূরদর্শী।

6- আয়াত 9 সূরা 23 يايهاالذينامنوالاتتخذواابآءكمواخوانكماوليآءاناستحبواالكفرعلىالايمان ومنيتولهممنكمفاولئكهمالظلمون

অর্থ: হে মুমিনগণ! বিশ্বাসের মুখে যদি আপনার পিতা এবং ভাইয়েরা আপনার কাছে প্রিয় হন তবে তাদেরকে আপনার বন্ধু বানাবেন না। যদি আপনার কেউ তাদেরকে আপনার বন্ধু বানায় তবে এই জাতীয় লোকেরা অত্যাচারী হবে।

7- আয়াত 9 সূরা 37 انماالنسىءزيادةفىالكفر يضلبهالذينكفروايحلونهعاماويحرمونهعام شولاطواعدةماحرماللهفيحلواماحرمالله زينلهمسوءاعمالهم واللهلايهدىالقومالكفرين

অর্থ: অপসারণ (সম্মানের মাসগুলির) কেবল কুফরের বৃদ্ধি, যা থেকে অস্বীকারকারীদের মাড়িতে পড়ে। একদিন তারা তাকে হালাল (হালাল) করে এবং এক বছরে তাকে হারাম করে দেয়, যাতে আল্লাহর আদর (মাস) পূর্ণ হয় এবং এভাবে আল্লাহর হারামকে বৈধতা দেয়। তাদের নিজস্ব মন্দ কর্ম তাদের কাছে আনন্দদায়ক হয়ে উঠেছে এবং আল্লাহ অস্বীকারকারীদের সরাসরি পথ প্রদর্শন করেন না।

8- আয়াত 5 সূরা 57 ييهاالذينامنوالاتتخذواالذيناتخذوادينكمهزواولعبامنالذيناوتواالكتبمنقبلكموالكفاراوليآء واتقوااللهانكنتممؤمني

অর্থ: হে মুমিনগণ! আপনার আগে যাদের বইটি দেওয়া হয়েছিল, যারা আপনার ধর্মকে হাস্যকর করে তুলেছে, যারা এটিকে অস্বীকার করে তাদের আপনার বন্ধু বানিয়ে দেবেন না। আল্লাহকে ভয় কর যদি তোমরা আন্তরিক হয়ে থাক।

9- আয়াত 33 সূরা 61 مَّلۡـعُوۡنِيۡنَ ۡاَيۡنَمَاثُقِفُوۡۤااُخِذُوۡاوَقُتِّلُوۡاتَقۡتِيۡلً

অর্থ: অবশ্যই ফিট থাকতে হবে। যেখানেই পাওয়া যাবে, তারা ধরা পড়বে এবং কঠোরভাবে হত্যা করা হবে।

10- আয়াত 21 সূরা 98 اِنَّكُمۡوَمتاعَبۡدُوۡنَمِنۡدُوۡنِاللّٰهِحَصَبُجَهَـنَّمَؕاَنۡـتُمۡلَهَاوَارِدُوۡنَ

অর্থ: নিশ্চয় তোমরা এবং আল্লাহ ব্যতীত যাদের কজন ইবাদাত কর, তারা সকলেই আত্মার জ্বালানী। আপনি নীচে নেমে আসবে।

11- আয়াত 32 সূরা 22 وَمَنۡاَظۡلَمُمِمَّنۡذُكِّرَبِاٰيٰتِرَبِّهٖثُمَّاَعۡرَضَعَنۡهَا ِناِنَّامِنَالۡمُجۡرِمِيۡنَمُنۡتَقِمُوۡن

অর্থ: আর যে ব্যক্তি তার পালনকর্তার আয়াত দ্বারা স্মরণ করিয়ে দেওয়া হবে তার চেয়ে কে বেশি অত্যাচারী হবে, অতঃপর সে তাদের থেকে মুখ ফিরিয়ে নিল? অবশ্যই আমরা অপরাধীদের প্রতিশোধ নেব হ্যাঁ.

12 আয়াত 48 সূরা 20 وعدكماللهمغانمكثيرةتاخذونهافعجللكمهذهوكفايدىالناسعنكم ولتكونايةللمؤمنينويهديكمصراطامستقيما

অর্থ: আল্লাহ আপনাকে অনেক পুরষ্কারের প্রতিশ্রুতি দিয়েছেন, যা তোমরা পাবে। এই বিজয় আপনাকে তাত্ক্ষণিকভাবে নিশ্চিত করে তুলেছে এবং মানুষের হাত বন্ধ করে দিয়েছে (যাতে তারা আপনার উপর আক্রমণ করার সাহস করতে না পারে) এবং যাতে এটি মুমিনদের জন্য একটি চিহ্ন। এবং তিনি আপনাকে সরাসরি পথে পরিচালিত করতে পারেন।

13- আয়াত 8 সূরা 69 فَكُلُوۡامِمَّاغَنِمۡتُمۡحَلٰلاًطَيِّبًاۖوَّاتَّقُوااللّٰهَ ؕاِنَّاللّٰهَغَفُوۡرٌرَّحِيۡمٌ

অর্থ: সুতরাং, আপনি আপনার অর্থের জন্য যা কিছু জিনিস পেয়েছেন তা বৈধ ও পবিত্র হিসাবে খাবেন এবং আল্লাহকে ভয় করুন। নিশ্চয় আল্লাহ অত্যন্ত ক্ষমাশীল, পরম করুণাময়।

14- আয়াত 66 সূরা 9 يٰۤاَيُّهَاالنَّبِىُّجَاهِدِالۡكُفَّارَوَالۡمُنٰفِقِيۡنَوَاغۡلُظۡعَلَيۡهِمۡ َموَمَاۡوٰٮهُمۡجَهَنَِئِۡئِۡئِۡئِ

অর্থ: হে নবী! অস্বীকারকারী এবং মুনাফিকদের জিহাদ এবং তাদের সাথে কঠোর আচরণ করুন। তার জায়গা জাহান্নাম এবং অবশেষে তিনি পৌঁছানোর জন্য খুব খারাপ জায়গা।

15- আয়াত 41 সূরা 27 فَلَـنُذِيۡقَنَّالَّذِيۡنَكَفَرُوۡاعَذَابًاشَدِيۡدًاۙوَّلَنَجۡزِيَنَّهُمۡاَسۡوَاَالَّذِىۡكَانُوَلَُن

অর্থ: সুতরাং আমরা অবশ্যই তাদের অস্বীকারকারীদের কঠোর অত্যাচার উপভোগ করব এবং আমরা অবশ্যই তাদের নিকৃষ্টতম কর্মের প্রতিশোধ দেব।

16- আয়াত 41 সূরা 28 ذٰلِكَجَزَآءُاَعۡدَآءِاللّٰهِالنَّارُ هلَهُمۡفِيۡهَادَارُالۡخُـلۡدِ َجَزَآءًۢبِمَاكَانُوۡابِاٰيٰتِنَد

অর্থ: এটি আল্লাহর শত্রুদের প্রতিশোধ – আগুন। তাতে তাদের একটি চিরস্থায়ী বাড়ি রয়েছে যার বিনিময়ে তারা আমাদের আয়াতকে অস্বীকার করে চলেছে।

17 আয়াত 9 সূরা 111 اناللهاشترىمنالمؤمنينفسهمواموالهمبانلهمالجنة يقاتلونفىسبيلاللهفيقتلونويقتلون وعداعليهحقافىالتورٮةوالانجيلوالقران ومناوفىبعهدهمناللهفاستبشرواببيعكمالذىباهمتمهم وذهل

অর্থ: নিঃসন্দেহে আল্লাহ মুমিনদের কাছ থেকে তাদের জান ও মালামাল কিনেছেন যার বিনিময়ে তাদের জান্নাত রয়েছে। তারা আল্লাহর পথে লড়াই করে, হত্যা করে হত্যা করে। এটি তার দায়িত্ব, তাওরাত, ইনজিল এবং কোরআনে নিশ্চিত প্রতিশ্রুতি রয়েছে এবং আল্লাহ ব্যতীত কে তার প্রতিশ্রুতি পূর্ণ করতে পারে? সুতরাং আপনার চুক্তিটি উদযাপন করুন, আপনি তাঁর সাথে যে চুক্তি করেছিলেন। এবং এটিই সবচেয়ে বড় সাফল্য।

18- আয়াত 9 সূরা 58 وَمِنۡهُمۡمَّنۡيَّلۡمِزُكَفِىالصَّدَقٰتِ َافَاِنۡاُعۡطُوۡامِنۡهَارَضُوۡاوَاِنۡلَّمۡيُعۡطَۡۡۡۡۡخۡخۡخۡخۡخ

অর্থ: এবং তাদের মধ্যে কিছু সদকদের সম্পর্কে আপনাকে আঘাত করেছে। তবে যদি সেগুলি এ থেকে দেওয়া হয় তবে তারা খুশি হবে এবং যদি সেগুলি থেকে দেওয়া না হয় তবে আপনি দেখতে পাবে যে তারা রাগ শুরু করে।

19 আয়াত 8 সূরা 65 يايهاالنالنبىحرضالمؤمنينعلىالقتال انيكنمنكمعشرونصابرونيغلبوامائتين وانيكنمنكممائةيغلبواالفامنالذينكفروابانهمقوملايفقهون

অর্থ: হে নবী! মোমিনানদের জিহাদে সরান। যদি আপনার বিশ জন লোক নিথর হয়ে থাকে তবে তারা দুই শতাধিকের কার্যকর হবে এবং যদি আপনার একশ জন থাকে তবে তারা হাজারে অস্বীকারকারীদের পক্ষে কার্যকর হবে, কারণ তারা বোকা লোক।

20 আয়াত 5 সূরা 51 يايهاالذينامنوالاتتخذوااليهودوالنصرىاوليآء بعضهماولي آءبعض ومنيتولهممنكمفانهمنهم اناللهلايهدىالقومالظلمين

অর্থ: হে মুমিনগণ! ইহুদি ও খ্রিস্টানদেরকে আপনার বন্ধু (রাজদার) বানিয়ে দেবেন না। তারা (আপনার বিরুদ্ধে) একে অপরের বন্ধু। তোমাদের মধ্যে যে তাকেই তার বন্ধু বানিয়ে ফেলবে, সে সেই লোকদের মধ্যে থাকবে। নিশ্চয় আল্লাহ অত্যাচারীদের পথ দেখান না।

21 আয়াত 9 সূরা 29 قاتلواالذينلايؤمنونباللهولاباليومالاخرولايحرمونماحرماللهورسولولاينينينالحقمنالذيناوتواالكتبحتىيعطواالجزيةعنيدوهمصغرون

অর্থ: যারা আল্লাহ বা শেষ দিনে বা শেষ দিনে বা theমান এনেছে না আল্লাহ ও তাঁর রসূলের সাথে সামঞ্জস্য রেখে, অথবা সত্যধর্মের অনুসরণ করে না, তাদের সাথে লড়াই করে, এমনকি তারা ক্ষমতা থেকে পৃথক হয়ে ছোট দেওয়া শুরু করে (অধীনস্ত) ) জিজিয়া।

22 আয়াত 5 সূরা 14 ومنالذينقالواانانصرىاخذناميثاقهمفنسواحظامماذكروابهفاغرينابينهمالعداوةوالبغضآءالىيومالقيمة وسوفينبئهماللهبماكانوايصنعون

অর্থ: এবং আমরা তাদের কাছ থেকে দৃ strong় প্রতিশ্রুতিও নিয়েছিলাম যারা বলেছিল যে আমরা নাসারা (খ্রিস্টান), কিন্তু তাদের যা স্মরণ করিয়ে দেওয়া হয়েছিল তার একটি বড় অংশ ভুলে গেছি। অতঃপর আমরা কেয়ামত অবধি অবধি তাদের মধ্যে শত্রুতা ও শত্রুতার আগুন জ্বালিয়ে দিয়েছিলাম এবং আল্লাহ শীঘ্রই তাদেরকে জানিয়ে দেবেন যে তারা কি করছে।

23 আয়াত 4 সূরা 89 ودوالوتكفرونكماكفروافتكونونسوآء فلاتتخذوامنهماوليآءحتىيهاجروافىسبيلالله فانتولوافخذوهمواقتلوهمحيثوجدتموهم اتولاتتخذوام ِۡنۡهُمۡوَلِيًّاوَّلَانَصِيۡرًا

অর্থ: তারা চায় যে আপনিও তাদের মতো হয়ে যান যেমন তারা অন্যায় কাজ করে; সুতরাং তোমরা তাদের মধ্যে তোমাদের বন্ধু বানিয়ে ফেলো না, যদি না তারা আল্লাহর পথে বাড়ি ছেড়ে যায়। তারপরে যদি তারা এটির দিকে মুখ ফিরিয়ে নেয়, তাদের ধরে রাখুন এবং যেখানেই তারা পাবেন তাদের হত্যা করুন – তাদের কেউই আপনার বন্ধু বা সহকারী করে না।

24- আয়াত 9 সূরা 14 قَاتِلُوۡهُمۡيُعَذِّبۡهُمُاللّٰهُبِاَيۡدِيۡكُمۡوَيُخۡزِهِمۡوَيَنۡصُرۡكُمۡعَلَيۡهِمۡوَيَشۡفِصُدُوۡرَقَُّؤِِِِِ

অর্থ: তাদের সাথে লড়াই করো। আল্লাহ আপনাকে তাদের হাতে নির্যাতন ও লাঞ্ছিত করবেন এবং তিনি তাদের বিরুদ্ধে আপনাকে সাহায্য করবেন। যারা believeমান এনেছে তাদের অন্তরকে দুঃখ দেবে।

25- আয়াত 3 সূরা 151 سنلقىفىقلوبالذينكفرواالرعببمااشركواباللهمالمينزلبهسمٮن

অর্থ: আমরা শীঘ্রই যারা এটিকে অস্বীকার করে তাদের হৃদয়ে প্রবেশ করব, কারণ তারা আল্লাহর সাক্ষ্য হিসাবে এমন বিষয় ঘোষণা করেছে যার সাথে তারা কোন শান্তি করেনি এবং তাদের অবস্থান আগুনের (জাহান্নাম) এবং এর জন্য কি মন্দ জায়গা a অত্যাচারী।

26 আয়াত 2 সূরা 191 واقتلوهمحيثثقفتموهمواخرجوهممنحيثاخرجوكم والفتنةاشدمنالقتلولاتقتلوهمعندالمسجدالحرامحتىيقتلوكمفيه فانقتلوكمفاقتلوهمكذلكجزآءالكفرين

অর্থ: আপনি যেখানেই তাদের নিয়ন্ত্রণ করতে পারবেন, হত্যা করুন এবং যেখান থেকে তারা আপনাকে বের করে এনেছেন সেখান থেকে তাদের নিয়ে যান, কারণ ফিতনা (উপদ্রব) হত্যার চেয়ে গুরুতর। তবে মসজিদ-হারামের (কাবা) নিকটে আপনি তাদের সাথে লড়াই করবেন না যদি না তারা নিজেরাই সেখানে লড়াই করে। সুতরাং যদি তারা আপনার সাথে লড়াই করে তবে তাদের হত্যা করুন – এই জাতীয় অস্বীকৃতি এইরকম পরিবর্তিত হয়েছে।

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PUNJABI

ਸ਼ੀਆ ਵਕਫ ਬੋਰਡ ਦੇ ਸਾਬਕਾ ਚੇਅਰਮੈਨ ਵਸੀਮ ਰਿਜ਼ਵੀ ਵਸੀਮ ਰਿਜਵੀ ਨੇ ਕੁਰਾਨ ਦੀਆਂ 26 ਆਇਤਾਂ ਨੂੰ ਹਟਾਉਣ ਲਈ ਸੁਪਰੀਮ ਕੋਰਟ ਸੁਪਰੀਮ ਕੋਰਟ ਵਿੱਚ ਪਟੀਸ਼ਨ ਦਾਇਰ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਰਿਜਵੀ ਦੀ ਇਸ ਮੰਗ ਨੇ ਇੱਕ ਵੱਖਰੀ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਹਿਸ ਨੂੰ ਜਨਮ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਰਿਜਵੀ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਕੁਰਾਨ ਦੀਆਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਆਇਤਾਂ ਨਾਲ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਏਕਤਾ, ਅਖੰਡਤਾ ਅਤੇ ਭਾਈਚਾਰੇ ਨੂੰ ਖ਼ਤਰਾ ਹੈ। ਇਸ ਵਿਸ਼ਾ ਤੇ ਜਾਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ, ਆਓ ਜਾਣੀਏ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ 26 ਤੁਕਾਂ ਵਿੱਚ ਕੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਵਸੀਮ ਰਿਜਵੀ ਵਿਵਾਦਿਤ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਪੀਆਈਐਲ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, ਇਹ ਆਇਤਾਂ ਨਕਾਰਾਤਮਕ ਹਨ ਅਤੇ ਹਿੰਸਾ ਅਤੇ ਨਫ਼ਰਤ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਤ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ.

ਇਹ 26 ਤੁਕਾਂ ਹਨ
1 ਆਇਤ 9 ਸੂਰਾ 5 فاذاانسلخالاشهرالحرمفاقتلواالمشركينحيثوجدتموهموخذوهمواحصروهمواقعدوالهمكلمرصد فانتابواواقامواالصلوةواتواالزكوففلواسبيلهم اناللهغفوررحيم

ਭਾਵ: ਫਿਰ, ਜਦੋਂ ਹਰਮ (ਪ੍ਰਮੁੱਖ) ਮਹੀਨਾ ਪੂਰਾ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ, ਮੁਸ਼ਾਰਿਕਾਂ ਨੂੰ ਜਿਥੇ ਵੀ ਉਹ ਮਿਲਦੇ ਹਨ ਨੂੰ ਮਾਰ ਦਿਓ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਫੜ ਲਓ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਘੇਰ ਲਓ ਅਤੇ ਹਰ ਯਾਤਰਾ ਦੀ ਜਗ੍ਹਾ ‘ਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਨਜ਼ਰ ਵਿਚ ਬੈਠੋ. ਫਿਰ ਜੇ ਉਹ ਰੁਕਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਨਮਾਜ਼ ਦੀ ਪੇਸ਼ਕਸ਼ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਜ਼ਕਤਾਂ ਦੀ ਪੇਸ਼ਕਸ਼ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਤਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਰਸਤਾ ਛੱਡ ਦਿਓ, ਯਕੀਨਨ ਅੱਲਾਹ ਬਹੁਤ ਮੁਆਫ ਕਰਨ ਵਾਲਾ, ਮਿਹਰਬਾਨ ਹੈ.

2 ਆਇਤ 9 ਸੂਈ 28 يايهاالذينامنواانماالمشركوننجسفلايقربواالمسجدالحرامبعدعامهمذا وانخفتمعيلةفسوفيغنيكم اللهمنفضلهانشآء اناللهعليمحكيم

ਅਰਥ: ਹੇ ਵਿਸ਼ਵਾਸੀ! ਮਸ਼ਰਿਕ ਸਿਰਫ ਅਪਵਿੱਤਰ ਹੈ. ਇਸ ਲਈ, ਇਸ ਸਾਲ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮਸਜਿਦ-ਹਰਮ ਦੇ ਨੇੜੇ ਨਹੀਂ ਆਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਅਤੇ ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਗਰੀਬੀ ਤੋਂ ਡਰਦੇ ਹੋ, ਤਾਂ ਅੱਲਾਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਤੁਹਾਡੀ ਕਿਰਪਾ ਨਾਲ ਅਮੀਰ ਬਣਾ ਦੇਵੇਗਾ ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ. ਯਕੀਨਨ ਅੱਲ੍ਹਾ ਸਾਰੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਦਾ ਗਿਆਨਵਾਨ ਹੈ, ਬਹੁਤ ਅਲੌਕਿਕ.

3 ਤੁਕ 4 ਸੂਰਾ 101 واذاضربتمفىالارضفليسعليكمجناهنتقصروامنالصلوة خانخفتمانيفتنكمالذينكفروا انالكفرينكانوالكمعدوامبينا

ਅਰਥ: ਅਤੇ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਧਰਤੀ ਦੀ ਯਾਤਰਾ ਕਰਦੇ ਹੋ, ਤਾਂ ਪ੍ਰਾਰਥਨਾ ਨੂੰ ਸੌਖਾ ਬਣਾਉਣ ਵਿੱਚ ਤੁਹਾਡੇ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਅਪਰਾਧ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ; ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਡਰਦੇ ਹੋ ਕਿ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਲੋਕ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਤਾਉਣਗੇ ਅਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਮੁਸੀਬਤ ਦਾ ਕਾਰਨ ਦੇਣਗੇ. ਯਕੀਨਨ ਧਰਮ-ਨਿਰਪੱਖ ਤੁਹਾਡੇ ਖੁੱਲ੍ਹੇ ਦੁਸ਼ਮਣ ਹਨ.

4 ਆਇਤ 9 ਸੂਰਾ 123 يايهاالذينامنواقاتلواالذينيلونكممنالكفاروليجدوافيكمغلظة واعلموااناللهمعالمتقين

ਅਰਥ: ਹੇ ਵਿਸ਼ਵਾਸੀ! ਉਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਲੜੋ ਜਿਹੜੇ ਤੁਹਾਡੇ ਨੇੜੇ ਹਨ ਅਤੇ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕਿ ਉਹ ਤੁਹਾਡੇ ਵਿੱਚ ਤਾਕਤਵਰ ਬਣੇ, ਅਤੇ ਜਾਣੋ ਕਿ ਅੱਲਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਹੈ ਜੋ ਡਰਦੇ ਹਨ.

5- ਆਇਤ 4 ਸੂਰਾ 56 انالذينكفروابايتناسوفنصليهمناراكلمانضجتجلودهمبدلنهمجلوداغيرهاليذوقواالعذاب اناللهكانعزيزاحكيما

ਅਰਥ: ਉਹ ਜਿਹੜੇ ਸਾਡੀ ਬਾਣੀ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਅਸੀਂ ਜਲਦੀ ਹੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅੱਗ ਵਿੱਚ ਸੁੱਟ ਦੇਵਾਂਗੇ. ਜਦੋਂ ਵੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਛੱਲਾਂ ਪਕਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ, ਅਸੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਹੋਰ ਛਿਲਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬਦਲ ਦੇਵਾਂਗੇ, ਤਾਂ ਜੋ ਉਹ ਤਸੀਹੇ ਚੱਖਦੇ ਰਹਿਣ. ਬਿਨਾਂ ਸ਼ੱਕ ਅੱਲ੍ਹਾ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ, ਦਰਸ਼ਨਵਾਨ ਹੈ.

6- ਆਇਤ 9 ਸੂਰਾ 23 يايهاالذينامنوالاتتخذواابآءكمواخوانكماوليآءاناستحبواالكفرعلىالايمان ومنيتولهممنكمفاولئكهمالظلمون

ਅਰਥ: ਹੇ ਵਿਸ਼ਵਾਸੀ! ਆਪਣੇ ਪਿਤਾ ਅਤੇ ਭਰਾਵਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣਾ ਦੋਸਤ ਨਾ ਬਣਾਓ ਜੇ ਉਹ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪਿਆਰੇ ਹਨ. ਜੇ ਤੁਹਾਡੇ ਵਿਚੋਂ ਕੋਈ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣਾ ਮਿੱਤਰ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਅਜਿਹੇ ਲੋਕ ਜ਼ਾਲਮ ਹੋਣਗੇ.

7- ਆਇਤ 9 ਸੂਰਾ ان 37 انماالنسىءزيزيةفىالكفر يضلبهالذينكفروايحلونهعاماويحرمونهعاماليواطواعداحماحرماللهفيحلواماحرمالله زينلهمسوءاعمالهم واللهلايهدىالقومالكفرين

ਭਾਵ: ਕੱ honorਣਾ (ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੇ ਮਹੀਨਿਆਂ) ਵਿਚ ਕੁਫ਼ਰ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਗੱਮ ਵਿਚ ਪੈ ਜਾਂਦੇ ਹਨ. ਕਿਸੇ ਦਿਨ ਉਹ ਉਸਨੂੰ ਹਲਾਲ (ਕਾਨੂੰਨੀ) ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਕਿਸੇ ਸਾਲ ਉਸ ਨੂੰ ਹਰਾਮ ਬਣਾ ਦਿੰਦੇ ਹਨ, ਤਾਂ ਕਿ ਅੱਲ੍ਹਾ ਦੇ ਅਧਰਿਤ (ਮਹੀਨਿਆਂ) ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਪੂਰੀ ਹੋ ਸਕੇ, ਅਤੇ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅੱਲ੍ਹਾ ਦੇ ਹਰਮ ਨੂੰ ਜਾਇਜ਼ ਠਹਿਰਾਇਆ ਜਾਵੇ. ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਆਪਣੀਆਂ ਬੁਰਾਈਆਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਲਈ ਸੁਹਾਵਣੀਆਂ ਹੋ ਗਈਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਅੱਲ੍ਹਾ ਇਨਕਾਰ ਕਰਨ ਵਾਲਿਆਂ ਨੂੰ ਸਿੱਧਾ ਰਸਤਾ ਨਹੀਂ ਦਿਖਾਉਂਦਾ.

8- ਆਇਤ 5 ਸੂਰਾ 57 يايهاالذينامنوالاتتخذواالذيناتخذوادينكمهزواولعبامنالذيناوتواالكتبمنقبلكموالكفاراوليآء واتقوااللهانكنتممؤمني

ਅਰਥ: ਹੇ ਵਿਸ਼ਵਾਸੀ! ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਤੁਹਾਡੇ ਅੱਗੇ ਕਿਤਾਬ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਸੀ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਤੁਹਾਡੇ ਧਰਮ ਨੂੰ ਹੱਸਣ ਯੋਗ ਬਣਾਇਆ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣਾ ਮਿੱਤਰ ਨਾ ਬਣਾਓ. ਅਤੇ ਅੱਲ੍ਹਾ ਤੋਂ ਡਰੋ ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਸੁਹਿਰਦ ਹੋ.

9- ਆਇਤ Surah 33 ਸੂਰਾ ّ१ مَّلۡـعُوۡنِيۡنَ ۛۚاَيۡنَمَاثُقِفُوخااُخِذُوۡاوَقُتِّلُوۡاتَقۡتِيۡلً

ਅਰਥ: ਫਿੱਟ ਹੋਣਾ ਲਾਜ਼ਮੀ ਹੈ. ਜਿਥੇ ਵੀ ਮਿਲੇ, ਉਹ ਫੜੇ ਜਾਣਗੇ ਅਤੇ ਬੁਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਾਰ ਦਿੱਤੇ ਜਾਣਗੇ.

10- ਆਇਤ 21 ਸੂਰਾ 98 اِنَّكُمۡوَمتاعَبۡدُوۡنَمِنۡدُوۡنِاللّٰهِحَصَبُجَهَـنَّمَؕاَنۡـتُمۡلَهَاوَارِدُوۡنَ

ਅਰਥ: ਯਕੀਨਨ ਤੁਸੀਂ ਅਤੇ ਕੁਝ ਹੀ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਤੁਸੀਂ ਅੱਲ੍ਹਾ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ ਪੂਜਾ ਕਰਦੇ ਹੋ, ਸਾਰੇ ਹੀ ਆਤਮਾ ਦਾ ਬਾਲਣ ਹਨ. ਤੁਸੀਂ ਹੇਠਾਂ ਆ ਜਾਓਗੇ

11- ਆਇਤ 32 ਸੂਤ 22 وَمَنۡاَظۡلَمُمِمَّنۡذُكِّرَبِاٰيٰتِرَبِّهٖثُمَّاَعۡرَضَعَنۡهَا ِناِنَّامِنَالۡمُجۡرِمِيۡنَمُنۡتَقِمُوۡن

ਅਰਥ: ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਅਕਤੀ ਨਾਲੋਂ ਵੱਡਾ ਜ਼ਾਲਮ ਕੌਣ ਹੋਵੇਗਾ ਜਿਹੜਾ ਆਪਣੇ ਸੁਆਮੀ ਦੀਆਂ ਬਾਣੀਆਂ ਦੁਆਰਾ ਯਾਦ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਉਹ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਮੂੰਹ ਮੋੜਦਾ ਹੈ? ਯਕੀਨਨ ਅਸੀਂ ਅਪਰਾਧੀਆਂ ਤੋਂ ਬਦਲਾ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ ਹਾਂ.

12 ਆਇਤ 48 ਸੂਰਾ 20 وعدكماللهمغانمكثيرةتاخذونهافعجللكمهذهوهوفافايدىالناسعنكم ولتكونايةللمؤمنينويهديكمصراطامستقيما

ਅਰਥ: ਅੱਲ੍ਹਾ ਨੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਇਨਾਮ ਦੇਣ ਦਾ ਵਾਅਦਾ ਕੀਤਾ ਹੈ, ਜੋ ਤੁਸੀਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰੋਗੇ. ਇਸ ਜਿੱਤ ਨੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਕਦਮ ਨਿਸ਼ਚਤ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਅਤੇ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਹੱਥਾਂ ਨੂੰ ਰੋਕ ਦਿੱਤਾ (ਤਾਂ ਜੋ ਉਹ ਤੁਹਾਡੇ ‘ਤੇ ਹਮਲਾ ਕਰਨ ਦੀ ਹਿੰਮਤ ਨਾ ਕਰ ਸਕਣ) ਅਤੇ ਤਾਂ ਜੋ ਵਿਸ਼ਵਾਸੀਆਂ ਲਈ ਇਹ ਇਕ ਸੰਕੇਤ ਸੀ. ਅਤੇ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਿੱਧੇ ਰਸਤੇ ਵੱਲ ਸੇਧ ਦੇਵੇ.

13- ਆਇਤ 8 ਸੂਰਾ 69 فَكُلُوۡامِمَّاغَنِمۡتُمۡحَلٰلاًطَيِّبًاۖوَّاتَّقُوااللّٰهَ ؕاِنَّاللّٰهَغَفُوۡرٌرَّحِيۡمٌ

ਅਰਥ: ਇਸ ਲਈ, ਜੋ ਵੀ ਮਾਲ ਤੁਹਾਡੇ ਪੈਸੇ ਲਈ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਇਸ ਨੂੰ ਜਾਇਜ਼ ਅਤੇ ਪਵਿੱਤਰ ਸਮਝੋ ਅਤੇ ਅੱਲ੍ਹਾ ਤੋਂ ਡਰਦੇ ਰਹੋ. ਯਕੀਨਨ ਅੱਲ੍ਹਾ ਬਹੁਤ ਹੀ ਮੁਆਫ਼ ਕਰਨ ਵਾਲਾ, ਬਹੁਤ ਦਿਆਲੂ ਹੈ.

14- ਆਇਤ 66 ਸੂਤ 9 يٰۤاَيُّهَاالنَّبِىُّجَاهِدِالۡكُفَّارَوَالۡمُنٰفِقِيۡنَوَاغۡلُظۡعَلَيۡهِمۡ َموَمَاۡوٰٮهُمۡجَهَنَِئِۡئِۡئِۡئِ

ਅਰਥ: ਹੇ ਨਬੀ! ਮੁਨਕਰਾਂ ਅਤੇ ਪਖੰਡੀਆਂ ਨੂੰ ਜਹਾਦ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਸਖਤੀ ਨਾਲ ਪੇਸ਼ ਆਓ. ਉਸਦੀ ਜਗ੍ਹਾ ਜਹਨਾਂਮ ਹੈ ਅਤੇ ਆਖਰਕਾਰ ਉਹ ਪਹੁੰਚਣ ਲਈ ਬਹੁਤ ਮਾੜੀ ਜਗ੍ਹਾ ਹੈ.

15- ਆਇਤ Surah१ ਸੂਰੀ ف 27 فَلَـنُذِيۡقَنَّالَّذِيۡنَكَفَرُوۡاعَذَابًاشَدِيۡدًاۙوَّلَنَجۡزِيَنَّهُمۡاَسۡوَاَالَّذِىۡكَانُوَلَُن

ਅਰਥ: ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਸਖ਼ਤ ਤਸੀਹੇ ਦਾ ਜ਼ਰੂਰ ਆਨੰਦ ਲਵਾਂਗੇ ਜੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਭੈੜੇ ਕੰਮਾਂ ਦਾ ਬਦਲਾ ਜ਼ਰੂਰ ਦੇਵਾਂਗੇ.

16- ਤੁਕ 41 ਸੂਹੀ 28 ذٰلِكَجَزَآءُاَعۡدَآءِالالّٰهِالنَّارُ هلَهُمۡفِيۡهَادَارُالۡخُـلۡدِ َجَزَآءًۢبِمَاكَانُوۡابِاٰيٰتِنَد

ਅਰਥ: ਇਹ ਅੱਲ੍ਹਾ ਦੇ ਦੁਸ਼ਮਣਾਂ – ਅਗਨੀ ਦਾ ਬਦਲਾ ਹੈ. ਉਸ ਵਿੱਚ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਕੋਲ ਸਦੀਵੀ ਘਰ ਹੈ, ਇਸ ਦੇ ਬਦਲੇ ਵਿੱਚ ਉਹ ਸਾਡੀਆਂ ਆਇਤਾਂ ਨੂੰ ਨਕਾਰਦੇ ਰਹੇ.

17 ਤੁਕ 9 ਸੂਰਾ 111 اناللهاشترىمنالمؤمنينفسهمواموالهمبانلهمالجنة يقاتلونفىسبيلاللهفيقتلونويقتلون وعداعليهحقافىالتورٮةوالانجيلوالقران ومناوفىبعهدهمناللهفاستبشرواببيعكمالذىباهمهمهم وذل

ਅਰਥ: ਬਿਨਾਂ ਸ਼ੱਕ ਅੱਲ੍ਹਾ ਨੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਰੂਹਾਂ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਮਾਲ ਵਿਸ਼ਵਾਸੀਆਂ ਕੋਲੋਂ ਬਦਲੇ ਵਿਚ ਖਰੀਦਿਆ ਹੈ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕੋਲ ਫਿਰਦੌਸ ਹੈ. ਉਹ ਅੱਲ੍ਹਾ ਦੇ ਰਸਤੇ ਵਿਚ ਲੜਦੇ ਹਨ, ਉਹ ਮਾਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਮਾਰ ਦਿੱਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ. ਇਹ ਉਸਦੇ ਵਾਅਦਾ, ਤੌਰਾਤ, ਇੰਜਿਲ ਅਤੇ ਕੁਰਆਨ ਵਿਚ ਇਕ ਪੱਕਾ ਵਾਅਦਾ (ਕੀਤਾ) ਹੈ, ਅਤੇ ਅੱਲ੍ਹਾ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਕੌਣ ਆਪਣਾ ਵਾਅਦਾ ਪੂਰਾ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ? ਇਸ ਲਈ ਆਪਣਾ ਸੌਦਾ ਮਨਾਓ, ਉਹ ਸੌਦਾ ਜੋ ਤੁਸੀਂ ਉਸ ਨਾਲ ਕੀਤਾ ਸੀ. ਅਤੇ ਇਹ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡੀ ਸਫਲਤਾ ਹੈ.

18- ਆਇਤ 9 ਸੂਰਾ 58 وَمِنۡهُمۡمَّنۡيَّلۡمِزُكَفِىالصَّدَقٰتِ َافَاِنۡاُعۡطُوۡامِنۡهَارَضُوۡاوَاِنۡلَّمۡيُعۡطَۡۡۡۡۡخۡخۡخۡخۡخ

ਅਰਥ: ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕੁਝ ਸਦਾਕਿਆਂ ਬਾਰੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੁਖੀ ਕਰਦੇ ਹਨ. ਪਰ ਜੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਤੋਂ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਉਹ ਖੁਸ਼ ਹੋਣਗੇ ਅਤੇ ਜੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਤੋਂ ਨਹੀਂ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ, ਤਾਂ ਤੁਸੀਂ ਦੇਖੋਗੇ ਕਿ ਉਹ ਗੁੱਸੇ ਹੋਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ.

19 ਆਇਤ 8 ਸੂਰਾ 65 يايهاالنبىحرضالمؤمنينعلىالقتال انيكنمنكمعشرونصابرونيغلبوامائتين وانيكنمنكممائةيغلبواالفامنالذينكفروابانهمقوملايفقهون

ਅਰਥ: ਹੇ ਨਬੀ! ਮੋਮਿਨਾਨਾਂ ਨੂੰ ਜੇਹਾਦ ‘ਤੇ ਭੇਜੋ. ਜੇ ਤੁਹਾਡੇ ਵੀਹ ਆਦਮੀ ਠੰ .ੇ ਹੋਏ ਹਨ, ਤਾਂ ਉਹ ਦੋ ਸੌ ਤੋਂ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਹੋਣਗੇ, ਅਤੇ ਜੇ ਤੁਹਾਡੇ ਵਿਚੋਂ ਇਕ ਸੌ ਹਨ, ਤਾਂ ਉਹ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਲੋਕਾਂ ਤੇ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਹੋਣਗੇ ਜੋ ਇਨਕਾਰ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਕਿਉਂਕਿ ਉਹ ਮੂਰਖ ਹਨ.

20 ਆਇਤ 5 ਸੂਰਾ 51 يايهاالذينامنوالاتتخذوااليهودوالنصرىاوليآء بعضهماوليآءبعض ومنيتولهممنكمفانهمنهم اناللهلايهدىالقومالظلمين

ਅਰਥ: ਹੇ ਵਿਸ਼ਵਾਸੀ! ਯਹੂਦੀਆਂ ਅਤੇ ਈਸਾਈਆਂ ਨੂੰ ਆਪਣਾ ਦੋਸਤ (ਰਜ਼ਦਾਰ) ਨਾ ਬਣਾਓ. ਉਹ (ਤੁਹਾਡੇ ਵਿਰੁੱਧ) ਇਕ ਦੂਜੇ ਦੇ ਦੋਸਤ ਹਨ. ਤੁਹਾਡੇ ਵਿੱਚੋਂ ਜਿਹੜਾ ਵੀ ਉਸਨੂੰ ਆਪਣਾ ਦੋਸਤ ਬਣਾਵੇਗਾ, ਉਹ ਉਨ੍ਹਾਂ ਲੋਕਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਇੱਕ ਹੋਵੇਗਾ। ਬੇਸ਼ਕ ਅੱਲ੍ਹਾ ਜ਼ੁਲਮ ਕਰਨ ਵਾਲਿਆਂ ਨੂੰ ਰਸਤਾ ਨਹੀਂ ਦਿਖਾਉਂਦਾ.

21 ਆਇਤ 9 ਸੂਰਾ 29 قاتلواالذينلايؤمنونباللهولاباليومالاخرولايحرمونماحرماللهورسولهولاينينينالحقمنالذيناوتواالكتبحتىيعطواالجزيةعنيدوهمصغرون

ਅਰਥ: ਉਹ ਜਿਹੜੇ ਨਾ ਤਾਂ ਅੱਲ੍ਹਾ ਤੇ ਨਾ ਹੀ ਆਖ਼ਰੀ ਦਿਨ, ਨਾ ਹੀ ਆਖਰੀ ਦਿਨ, ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਅੱਲ੍ਹਾ ਅਤੇ ਉਸ ਦੇ ਦੂਤ ਨਾਲ ਮੇਲ ਖਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਉਹ ਸੱਤਿਆਧਰਮ ਦਾ ਪਾਲਣ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਲੜਦੇ ਹਨ, ਇਥੋਂ ਤਕ ਕਿ ਉਹ ਸੱਤਾ ਤੋਂ ਵੱਖ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਛੋਟੇ (ਅਧੀਨ) ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ) ਜੀਜਿਆ.

22 ਆਇਤ 5 ਸੂਹੀ 14 ومنالذينقالواانانصرىاخذناميثاقهمفنسواحظامماذكروابهفاغرينابينهمالعداوةوالبغضآءالىيومالقيمة وسوفينبئهم اللهبماكانوايصنعون

ਅਰਥ: ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਸਖ਼ਤ ਵਾਅਦਾ ਵੀ ਕੀਤਾ ਸੀ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਸੀ ਕਿ ਅਸੀਂ ਨਸਾਰਾ (ਈਸਾਈ) ਹਾਂ, ਪਰ ਉਸ ਦੇ ਇੱਕ ਵੱਡੇ ਹਿੱਸੇ ਨੂੰ ਭੁੱਲ ਜਾਓ ਜੋ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਯਾਦ ਦਿਵਾਇਆ ਗਿਆ ਸੀ. ਫਿਰ ਅਸੀਂ ਘੰਟਿਆਂ ਦੇ ਅੰਤ ਤੱਕ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਦੁਸ਼ਮਣੀ ਅਤੇ ਦੁਸ਼ਮਣੀ ਦੀ ਅੱਗ ਨੂੰ ਭੜਕਾਇਆ ਅਤੇ ਅੱਲ੍ਹਾ ਜਲਦੀ ਹੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਦੱਸ ਦੇਵੇਗਾ ਕਿ ਉਹ ਕੀ ਕਰ ਰਹੇ ਸਨ.

23 ਤੁਕ 4 ਸੂਰਾ 89 ودوالوتكفرونكماكفروافتكونونسوآء فلاتتخذوامنهماوليآءحتىيهاجروافىسبيلالله فانتولوافخذوهمواقتلوهمحيثوجدتموهم اتولاتتخذوام ِۡنۡهُمۡوَلِيًّاوَّلَانَصِيۡرًا

ਅਰਥ: ਉਹ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਰਗੇ ਹੋਵੋ ਜਿਵੇਂ ਉਹ ਕੁਧਰਮ ਹਨ; ਇਸ ਲਈ ਆਪਣੇ ਮਿੱਤਰਾਂ ਨੂੰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਨਾ ਬਣਾਓ, ਜਦੋਂ ਤੱਕ ਉਹ ਅੱਲ੍ਹਾ ਦੇ ਰਸਤੇ ਘਰ ਨਹੀਂ ਛੱਡਦੇ. ਫਿਰ ਜੇ ਉਹ ਇਸ ਤੋਂ ਪਿੱਛੇ ਮੁੜਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਫੜੋ ਅਤੇ ਜਿਥੇ ਵੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਲੱਭੋ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮਾਰ ਦਿਓ – ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਤੁਹਾਡਾ ਮਿੱਤਰ ਜਾਂ ਸਹਾਇਕ ਨਹੀਂ ਬਣਾਉਂਦਾ.

24- ਆਇਤ 9 ਸੂਰਾ 14 قَاتِلُوۡهُمۡيُعَذِّبۡهُمُاللّٰهُبِاَيۡدِيۡكُمۡوَيُخۡزِهِمۡوَيَنۡصُرۡكُمۡعَلَيۡهِمۡوَيَشۡفِصُدُوۡرَقَُّؤِِِ

ਅਰਥ: ਉਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਲੜੋ. ਅੱਲ੍ਹਾ ਤੁਹਾਡੇ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਤਸੀਹੇ ਦੇਵੇਗਾ ਅਤੇ ਅਪਮਾਨਿਤ ਕਰੇਗਾ ਅਤੇ ਉਹ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਵਿਰੁੱਧ ਤੁਹਾਡੀ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰੇਗਾ. ਅਤੇ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਕਰਨ ਵਾਲਿਆਂ ਦੇ ਦਿਲਾਂ ਨੂੰ ਉਦਾਸ ਕਰ ਦੇਵੇਗਾ.

25 ਆਇਤ 3 ਸੂਰਿਆ 151 سنلقىفىقلوبالذينكفرواالرعببمااشركواباللهمالمينزلبهسمٮن

ਅਰਥ: ਅਸੀਂ ਜਲਦੀ ਹੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਦਿਲਾਂ ਵਿਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਕਰਾਂਗੇ ਜੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਕਿਉਂਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਅੱਲ੍ਹਾ ਦੀ ਗਵਾਹ ਵਜੋਂ ਅਜਿਹੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਘੋਸ਼ਿਤ ਕੀਤੀਆਂ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਕੋਈ ਸ਼ਾਂਤੀ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਹੈ, ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਠਿਕਾਣਾ ਅੱਗ (ਜਹਾਂਨਮ) ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਕੀ ਭੈੜੀ ਜਗ੍ਹਾ ਹੈ. ਜ਼ੁਲਮ ਕਰਨ ਵਾਲੇ.

26 ਆਇਤ 2 ਸੂਰਾ 191 واقتلوهمحيثثقفتموهمواخرجوهممنحيثاخرجوكم والفتنةاشدمنالقتلولاتقتلوهمعندالمسجدالحرامحتىيقتلوكمفيه فانقتلوكمفاقتلوهمكذلكجزآءالكفرين

ਅਰਥ: ਜਿੱਥੇ ਕਿਤੇ ਵੀ ਤੁਸੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕਾਬੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮਾਰੋ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਉੱਥੋਂ ਲੈ ਜਾਓ ਜਿਥੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਾਹਰ ਕੱ .ਿਆ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਫਿਟਨਾ (ਪ੍ਰੇਸ਼ਾਨੀ) ਕਤਲ ਨਾਲੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਗੰਭੀਰ ਹੈ. ਪਰ ਮਸਜਿਦ-ਹਰਮ (ਕਾਬਾ) ਦੇ ਨੇੜੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਲੜਨਾ ਨਹੀਂ ਚਾਹੀਦਾ ਜਦ ਤਕ ਉਹ ਖੁਦ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੜਨ ਨਹੀਂ ਦਿੰਦੇ. ਇਸ ਲਈ ਜੇ ਉਹ ਤੁਹਾਡੇ ਨਾਲ ਲੜਦੇ ਹਨ, ਤਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮਾਰੋ – ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਇਨਕਾਰ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਬਦਲ ਗਏ ਹਨ

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ENGLISH

Former Shia Waqf Board chairman Wasim Rizvi Wasim Rizvi has filed a PIL in the Supreme Court Supreme Court of India for the removal of 26 verses of the Quran. This demand of Rizvi has given rise to a different kind of debate. According to Rizvi, the unity, integrity and brotherhood of the country is threatened by these verses of the Quran. Before going to this topic, let us know what is there in those 26 verses, due to which they are called Wasim Rizvi disputed. According to the PIL, these verses are negative and promote violence and hatred.

These are 26 verses
1 verse 9 Surah 5 فاذاانسلخالاشهرالحرمفاقتلواالمشركينحيثوجدتموهموخذوهمواحصروهمواقعدوالهمكلمرصد فانتابواواقامواالصلوةواتواالزكوةفخلواسبيلهم اناللهغفوررحيم

Meaning: Then, when the haram (eminent) month is over, kill the Musharikas wherever they are found, capture them and surround them and sit in their gaze in the place of every ambush. Then if they stop and offer namaaz and offer zakat, then leave their path, surely Allah is very forgiving, merciful.

2 verse 9 Surah 28 يايهاالذينامنواانماالمشركوننجسفلايقربواالمسجدالحرامبعدعامهمهذا وانخفتمعيلةفسوفيغنيكماللهمنفضلهانشآء اناللهعليمحكيم

Meaning: O believers! Mushrik is just impure. Therefore, after this year, they should not come near the Masjid-Haram and if you are afraid of poverty, then Allah will enrich you with His grace if you want to. Surely Allah is the knowledgeer of all things, very metaphysical.

3 verse 4 Surah 101 واذاضربتمفىالارضفليسعليكمجناحانتقصروامنالصلوة انخفتمانيفتنكمالذينكفروا انالكفرينكانوالكمعدوامبينا

Meaning: And when you travel in the earth, then there is no crime in you to make the prayer narrower; If you are afraid that heretics will persecute you and cause you trouble. Surely heretics are your open enemies.

4 verse 9 Surah 123 يايهاالذينامنواقاتلواالذينيلونكممنالكفاروليجدوافيكمغلظة واعلموااناللهمعالمتقين

Meaning: O believers! Fight those who are near you and want them to be strong in you, and know that Allah is with those who fear.

5- verse 4 Surah 56 انالذينكفروابايتناسوفنصليهمناراكلمانضجتجلودهمبدلنهمجلوداغيرهاليذوقواالعذاب اناللهكانعزيزاحكيما

Meaning: Those who deny our verses, we will soon throw them into the fire. Whenever their skins are cooked, we will convert them into other skins, so that they will keep tasting the torture. Undoubtedly Allah is the dominant, the visionary.

6- verse 9 Surah 23 يايهاالذينامنوالاتتخذواابآءكمواخوانكماوليآءاناستحبواالكفرعلىالايمان ومنيتولهممنكمفاولئكهمالظلمون

Meaning: O believers! Do not make your father and your brothers your friends if they are dear to you in the face of faith. If anyone of you makes them your friend, then such people will be tyrannical.

7- verse 9 Surah 37 انماالنسىءزيادةفىالكفر يضلبهالذينكفروايحلونهعاماويحرمونهعاماليواطواعدةماحرماللهفيحلواماحرمالله زينلهمسوءاعمالهم واللهلايهدىالقومالكفرين

Meaning: Removal (of the months of honor) is just an increase in the kufr, from which the deniers fall into the gum. Someday they make him halal (lawful) and in some year make him haraam, so that the number of Allah’s Adhrit (months) will be fulfilled, and thus validate the haram of Allah. Their own evil deeds have become pleasant to them and Allah does not show a direct path to those who refuse.

8- verse 5 Surah 57 يايهاالذينامنوالاتتخذواالذيناتخذوادينكمهزواولعبامنالذيناوتواالكتبمنقبلكموالكفاراوليآء واتقوااللهانكنتممؤمني

Meaning: O believers! Those who were given the book before you, who have made your religion laughable, do not make those who deny it your friend. And fear Allah if you are sincere.

9- Verse 33 Surah 61 مَّلۡـعُوۡنِيۡنَ ۛۚاَيۡنَمَاثُقِفُوۡۤااُخِذُوۡاوَقُتِّلُوۡاتَقۡتِيۡلً

Meaning: Must be fit. Wherever found, they will be caught and will be severely killed.

10- Verse 21 Surah 98 اِنَّكُمۡوَمَاتَعۡبُدُوۡنَمِنۡدُوۡنِاللّٰهِحَصَبُجَهَـنَّمَؕاَنۡـتُمۡلَهَاوَارِدُوۡنَ

Meaning: Surely you and the few whom you worship except Allah are the fuel of all souls. You will come down to the pier.

11- Verse 32 Surah 22 وَمَنۡاَظۡلَمُمِمَّنۡذُكِّرَبِاٰيٰتِرَبِّهٖثُمَّاَعۡرَضَعَنۡهَا ؕاِنَّامِنَالۡمُجۡرِمِيۡنَمُنۡتَقِمُوۡن

Meaning: And who would be more tyrannical than the person who is reminded by the verses of his Lord, then he turns away from them? Sure we take revenge on criminals
Yes.

12 verse 48 Surah 20 وعدكماللهمغانمكثيرةتاخذونهافعجللكمهذهوكفايدىالناسعنكم ولتكونايةللمؤمنينويهديكمصراطامستقيما

Meaning: Allah has promised you many rewards, which you will receive. This victory made you instantly sure and stopped the hands of the people (so that they could not dare to attack you) and so that it was a token for the believers. And may he guide you directly to the path.

13- Verse 8 Surah 69 فَكُلُوۡامِمَّاغَنِمۡتُمۡحَلٰلاًطَيِّبًاۖوَّاتَّقُوااللّٰهَ ؕاِنَّاللّٰهَغَفُوۡرٌرَّحِيۡمٌ

Meaning: So whatever goods you have received for your money, eat it as legitimate and holy and keep fear of Allah. Surely Allah is very forgiving, extremely merciful.

14- Verse 66 Surah 9 يٰۤاَيُّهَاالنَّبِىُّجَاهِدِالۡكُفَّارَوَالۡمُنٰفِقِيۡنَوَاغۡلُظۡعَلَيۡهِمۡ ؕوَمَاۡوٰٮهُمۡجَهَنَِئِۡئِۡئُُِۡئِۡئۡ

Meaning: O Prophet! Jihad to the deniers and hypocrites and deal harshly with them. His place is Jahannam and it is a very bad place to finally reach.

15- Verse 41 Surah 27 فَلَـنُذِيۡقَنَّالَّذِيۡنَكَفَرُوۡاعَذَابًاشَدِيۡدًاۙوَّلَنَجۡزِيَنَّهُمۡاَسۡوَاَالَّذِىۡكَانُوَلَُن

Meaning: So we will surely enjoy the harsh torture of those who deny it, and we will surely give them the revenge for the worst deeds they have been doing.

16- Verse 41 Surah 28 ذٰلِكَجَزَآءُاَعۡدَآءِاللّٰهِالنَّارُ ۚلَهُمۡفِيۡهَادَارُالۡخُـلۡدِ ؕجَزَآءًۢبِمَاكَانُوۡابِاٰيٰتِنَد

Meaning: It is the revenge of the enemies of Allah – fire. In that, they have an everlasting house, in exchange for that which they continued to deny our verses.

17 verse 9 Surah 111 اناللهاشترىمنالمؤمنينانفسهمواموالهمبانلهمالجنة يقاتلونفىسبيلاللهفيقتلونويقتلون وعداعليهحقافىالتورٮةوالانجيلوالقران ومناوفىبعهدهمناللهفاستبشرواببيعكمالذىبايعتمبه وذلكهوالفوزالعظيم

Meaning: Undoubtedly Allah has bought their souls and their goods from the believers in return that they have a paradise. They fight in the path of Allah, they kill and are killed. It is a sure promise (made) in his charge, Taurat, Injil and Qur’an, and who can fulfill his promise more than Allah? So celebrate your deal, the deal you made with him. And this is the biggest success.

18- Verse 9 Surah 58 وَمِنۡهُمۡمَّنۡيَّلۡمِزُكَفِىالصَّدَقٰتِ ۚفَاِنۡاُعۡطُوۡامِنۡهَارَضُوۡاوَاِنۡلَّمۡيُعۡطَۡۡۡۡۡۡخۡخۡخ

Meaning: And some of them hurt you about the Sadakas. But if they are given from it, then they will be happy and if they are not given from it, then you will see that they start getting angry.

19 verse 8 Surah 65 يايهاالنبىحرضالمؤمنينعلىالقتال انيكنمنكمعشرونصابرونيغلبوامائتين وانيكنمنكممائةيغلبواالفامنالذينكفروابانهمقوملايفقهون

Meaning: O Prophet! Move the Mominans on jihad. If twenty of your men are frozen, they will be effective at two hundred, and if there are a hundred of you, they will be effective at a thousand of those who refuse, because they are foolish people.

20 verse 5 Surah 51 يايهاالذينامنوالاتتخذوااليهودوالنصرىاوليآء بعضهماوليآءبعض ومنيتولهممنكمفانهمنهم اناللهلايهدىالقومالظلمين

Meaning: O believers! Do not make Jews and Christians your friend (Razdar). They (against you) are friends of each other. Whoever among you will make him his friend, he will be among those people. Of course Allah does not show the way to the oppressors.

21 verse 9 Surah 29 قاتلواالذينلايؤمنونباللهولاباليومالاخرولايحرمونماحرماللهورسولهولايدينوندينالحقمنالذيناوتواالكتبحتىيعطواالجزيةعنيدوهمصغرون

Meaning: Those who believe neither in Allah nor on the last day nor on the last day nor in the destruction of Allah and His Messenger, nor do they follow Satyadharma, fight them, even they are separated from power and Start giving small (subordinate) jizya.

22 verse 5 Surah 14 ومنالذينقالواانانصرىاخذناميثاقهمفنسواحظامماذكروابهفاغرينابينهمالعداوةوالبغضآءالىيومالقيمة وسوفينبئهماللهبماكانوايصنعون

Meaning: And we had also taken strong promise from those who said that we are Nasara (Christians), but forget a big part of what they were reminded by. Then we provoked the fire of enmity and hostility between them till the end of the hour, and Allah will soon tell them what they were making.

23 verse 4 Surah 89 ودوالوتكفرونكماكفروافتكونونسوآء فلاتتخذوامنهماوليآءحتىيهاجروافىسبيلالله فانتولوافخذوهمواقتلوهمحيثوجدتموهم ولاتتخذوامِنۡهُمۡوَلِيًّاوَّلَانَصِيۡرًا

Meaning: They want to be unrighteous just as they themselves are unrighteous; So do not make your friends among them, unless they leave home in the way of Allah. Then if they turn their back on it, hold them, and kill them wherever they find them – neither of them make your friend nor assistant.

24- Verse 9 Surah 14 قَاتِلُوۡهُمۡيُعَذِّبۡهُمُاللّٰهُبِاَيۡدِيۡكُمۡوَيُخۡزِهِمۡوَيَنۡصُرۡكُمۡعَلَيۡهِمۡوَيَشۡفِصُدُوۡرَقٍَِِِِِۡۡۡ

Meaning: Fight them. Allah will torture and humiliate them with your hands and he will help you against them. And will grieve the hearts of those who believe.

25- Verse 3 Surah 151 سَنُلۡقِىۡفِىۡقُلُوۡبِالة

Meaning: We will soon strike the hearts of those who deny it, because they have declared such things as the witness of Allah with which they have not made any peace, and their whereabouts are fire (jahannam) and what is the bad place of the oppressors.

26 verse 2 Surah 191 واقتلوهمحيثثقفتموهمواخرجوهممنحيثاخرجوكم والفتنةاشدمنالقتلولاتقتلوهمعندالمسجدالحرامحتىيقتلوكمفيه فانقتلوكمفاقتلوهمكذلكجزآءالكفرين

Meaning: Wherever you can control them, kill them and take them out from where they have taken you out, because Fitna (nuisance) is more serious than murder. But near the Masjid-Haram (Kaaba) you should not fight them unless they themselves fight you there. So if they fight with you, then kill them – such denials have changed like this

(इस पूरे विषय संदर्भ का भाषांतरण करने का पूरा श्रेय वरिष्ठ विचारक श्री प्रेम आनंद जी को जाता है)

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